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दीपेंद्र बोले- राजधर्म निभाए केंद्र सरकार, सैलजा ने कहा- जजपा और निर्दलीय विधायक समर्थन वापस लें

Wed, 02 Dec 2020 09:47 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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दीपेंद्र हुड्डा, कुमारी सैलजा। - फोटो : फाइल फोटो
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राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि सरकार हठधर्मिता पर आ गई है। उसका रवैया पूरी तरह दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार ने एक बार भी ऐसा संकेत नहीं दिया कि वह किसानों की मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाएगी। इस तरह से उद्योग और व्यापार पर चंद घरानों का कब्जा होता जा रहा है, उसी तरह सरकार कृषि जगत को भी चंद सरमाएदारों के हाथों में सौंप देना चाहती है।

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उन्होंने कहा कि किसानों की ऐसी कोई मांग नहीं है जो सरकार न मान सके। सरकार अपनी जिद पर न अड़े। किसानों की सारी मांगें जायज हैं। उन्हें स्वीकार करे। अगर सरकार सचमुच किसानों का भला चाहती है तो सबसे पहले तीनों कानूनों को रद्द करे। किसान संगठनों को बुलाकर उनकी समस्याओं को जाने फिर समिति बनाकर व्यापक बहस के बाद किसानों की सहमति से कानून बनाया जाए।


सरकार ने जो कमेटी बनाने की पेशकश की है, वह प्रक्रिया संसद में कानून बनाने से पहले की है, जिसका सरकार ने पूरी तरह से उल्लंघन किया। उन्होंने बताया कि वह स्वयं कृषि मामलों की स्थायी संसदीय समिति के सदस्य रहे हैं और कृषि से संबंधित विधेयकों के लिए ये परंपरा रही है कि सभी किसान संगठनों को इस पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया जाता है। उनकी राय ली जाती है।

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विशेषज्ञों की राय जानी जाती है और तब जाकर विधेयक में आवश्यक सुधार के बाद उसे सर्वसम्मति से पारित किया जाता है। सरकार इन तीन कृषि कानूनों को अब तक के सबसे बड़े कृषि सुधार के तौर पर बता रही है तो फिर इन्हें अध्यादेश के जरिए क्यों लाया गया। कोरोना की आड़ में अध्यादेशों को क्यों जारी किया गया। इन विधेयकों की मांग किसने की थी। किसानों की मांगें बेहद सीधी हैं। एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) का कानूनी प्रावधान किए बिना किसी कानून का कोई मतलब नहीं। 

सरकार से समर्थन वापस लेकर जजपा किसानों के पक्ष में खड़ी हो : सैलजा
हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी सैलजा ने कहा कि कृषि विरोधी कानूनों को लेकर आज पूरे हरियाणा के किसान भाजपा सरकार के खिलाफ आंदोलनरत हैं। वह अपील करती हैं कि अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनते हुए जजपा (जननायक जनता पार्टी), निर्दलीय व भाजपा के किसान हितैषी विधायक सरकार का साथ छोड़कर इस निर्णायक लड़ाई में धरातल पर उतरकर किसानों का साथ दें। जिससे केंद्र सरकार पर कृषि कानूनों को वापस लेने का दबाव बनाया जा सके।

सैलजा ने कहा कि जजपा की तरफ से कृषि कानूनों को लेकर आया बयान सिर्फ दिखावटी है। चुनाव से पूर्व भाजपा के खिलाफ वोट मांगकर 10 सीटें अर्जित करने वाली जजपा ने पिछले वर्ष भाजपा को अपना समर्थन देकर प्रदेशवासियों के साथ विश्वासघात किया था। जजपा के पास आज एक मौका है कि वह इस सरकार से अपना समर्थन वापस लेकर हरियाणावासियों के पक्ष में खड़ी हो और निर्णायक लड़ाई में किसानों का साथ दे।
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