2021 देश के साथ ही पूरे विश्व को भी याद रहेगा। इस साल किसानों ने स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे बड़े आंदोलन को खड़ा कर ऐतिहासिक इबारत लिख दी। कृषि कानूनों के विरोध में शुरू हुआ यह आंदोलन 13 माह तक चला। अंत में केंद्र सरकार को किसानों के सामने घुटने टेकने पड़े और उनकी सभी मांगों को मानकर तीनों कृषि कानूनों को वापस लेना पड़ा।
5 जून, 2020 को केंद्र सरकार ने तीन कृषि विधेयकों को संसद के पटल पर रखा। 20 सितंबर को लोकसभा के बाद इसे राज्यसभा में पारित किया गया। यहीं से इस ऐतिहासिक आंदोलन की शुरुआत हुई। 24 सितंबर को आंदोलन की शुरुआत पंजाब के किसानों ने शुरू की। आंदोलन के तहत किसानों ने 3 दिन के लिए रेल रोकी।
15 अक्तूबर से आंदोलन चलाने की चेतावनी किसानों ने दी। इसके बाद आंदोलन के दौरान कई उतार चढ़ाव आए। रेल रोको से शुरू हुए किसान आंदोलन को अन्य राज्यों से भी भरपूर सहयोग मिला। इसके बाद लाखों किसानों ने गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में ट्रैक्टर रैली की। इस दौरान पहली बार आंदोलन हिंसात्मक हुआ।
आंदोलन के दौरान बेअदबी के आरोप में युवक की नृशंस हत्या दिल्ली बॉर्डर पर हुई। देश विरोधी तत्वों की शामूलियत के आरोपों से आंदोलन पर सवाल भी उठे। आंदोलन के दौरान लगभग 700 से अधिक किसानों की मौत भी हुई। 9 दिसंबर, 2021 को किसान संगठनों की कई मांगों को केंद्र सरकार ने स्वीकार किया।
मुआवजे को लेकर सहमति जताते हुए बिजली बिल को लेकर कहा गया कि संसद में लाने से पहले संयुक्त किसान मोर्चा से चर्चा की जाएगी। सरकार के नए प्रस्ताव पर पहले संयुक्त किसान मोर्चा की पांच नेताओं की कमेटी ने नई दिल्ली में बैठक की और फिर सिंघु बॉर्डर पर मोर्चा की बड़ी बैठक में प्रस्ताव को मंजूर कर लिया गया।