इराक में फंसे 40 पंजाबी युवकों के परिजनों की सांसें अटकी हुई हैं। वे रोजी रोटी की तलाश में गए अपने लाड़लों की सकुशल वापसी के लिए दुआएं कर रहे हैं। उन्हें अब केंद्र सरकार से आस है।
ये परिवार प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर गुहार लगा चुके हैं। अब इन परिवारों के लोग एक सप्ताह बाद इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मिलने जाएंगे।
बेटों की सलामती की दुआएं मांग रहे परिजन
गांव भोयेवाल का युवक मनजिंदर सिंह भी उन पंजाबियों में शामिल है जिनका इराक में अपहरण हो गया है। उसकी बहन गुरप्रीत कौर का रो रो कर बुरा हाल है।
बुधवार को पीडि़त परिवारों ने गुरुद्वारे जाकर अरदास की और बेटों की सलामत वापसी की दुआ मांगी। गुरपिंदर कौर ने कहा कि उसे पूरा विश्वास है कि इराक में आतंकियों के कब्जे में फंसे उसके भाई समेत सभी 41 युवाओं को वापस लाने के लिए सरकार पूरा जोर लगाएगी। फिर भी उनके मन में काफी खौफ है।
जिस कंपनी में कार्यरत थे, वह भी छोड़ गई
पिछले वर्ष पंजाब के युवा इराक की एक कंपनी तारीक अल रूर उदा में काम करने गए थे। इराक के मोसुल व तिकरित कस्बों में आतंकी संगठनों के कब्जे के बाद जिस कंपनी में ये नौजवान काम करते थे वह कंपनी भी भाग खड़ी हुई है।
अमृतसर जिले के मजीठा कस्बा के निक्टवर्ती गांव भोयेकला के युवक मनजिंदर सिंह की बहन गुरपिंदर कौर कहती है कि उसके भाई व उसके साथी जतिंदर सिंह, सोनू, सिमरन व हिमाचल का रहने वाला अमन इराक के आतंकी संगठन और आर्मी के बीच हो रहे युद्ध में फंसे है। बीते रविवार को भाई से उसकी बात हुई थी। इसके बाद उसे और कोई जानकारी नहीं मिल पाई।
कोई सार्थक कदम उठाए सरकार
गुरपिंदर कौर ने बताया कि उनके पास के ही एक गांव की रहने वाली रंजीत कौर का बेटा जतिंदर सिंह भी वहां फंसा हुआ है। उसने कहा कि अगर सरकार की ओर से कोई सार्थक कदम नहीं उठाया गया तो वे दिल्ली जाकर इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से भी मिलेंगे।