खुशप्रीत के अपहरण और हत्या मामले में जिला अदालत में उसके चाचा सुखविंद्र सिंह ने बयान दर्ज कराए। चाचा ने अपने बयानों में कहा कि खुशप्रीत का 21 दिसंबर 2010 को उनके घर के पास से अपहरण हुआ था।
इसकी जानकारी पुलिस को दी गई। उसके बाद अपहरणकर्ताओं की फिरौती मांगने की कॉल्स आई थीं।
पुलिस कार्रवाई के तहत देसुमाजरा में एक सरकारी स्कूल के पास उन्होंने 22 दिसंबर को अपहरणकर्ताओं को 4 लाख रुपये पकड़ाए थे।
आरोपी एक बाइक पर सवार थे। मोटरसाइकिल एक सरदार चला रहा था और उसके पीछे एक अन्य व्यक्ति भी बैठा था। दोनों ने चेहरे को ढका हुआ था।
19 फरवरी, 2011 को सुखविंद्र ने सेक्टर-34 थाने के तत्कालीन प्रभारी उदय पाल को आरोपियों द्वारा की गई काल्स के संबंध में जानकारी दी थी।
सुखविंद्र ने अदालत को बताया कि उसने अपहरणकर्ताओं द्वारा वारदात में इस्तेमाल की गई बाइक और 2 मई, 2011 को वारदात में शामिल नौकर नंदकिशोर की शिनाख्त की भी थी।
सुखविंद्र ने उस बैग की भी शिनाख्त की थी जिसे फिरौती की रकम डालने के लिए इस्तेमाल किया गया था।
अब बचाव पक्ष 10 दिसंबर को क्रॉस (जिरह) करेगा। खुशप्रीत का उसके पड़ोस में रहने वाले दो भाइयों सुखदेव और गुरविंद्र ने अपने नौकर नंदकिशोर के साथ मिलकर अपहरण कर लिया था।
बदले में परिवार से 4 लाख रुपये की फिरौती की मांग की गई थी। रकम देने के बाद भी उन्होंने खुशप्रीत की हत्या कर दी थी।