करीब 15 साल पहले रेलवे लाइन के लिए एक्वायर जमीन का बढ़ा मुआवजा महिला किसान को न देने के एक मामले में जिला अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मामले में जिला अदालत ने रेलवे के खिलाफ फैसला सुनाते हुए खरड़ से गुजरने वाले सभी रेलवे ट्रैक व खरड़ स्टेशन पर बनी बिल्डिंग को कुर्क करने के आदेश जारी किए हैं।
मामले की अगली सुनवाई अगस्त माह में निश्चित की गई। इस संबंध में अदालत में सनेटा निवासी गुरजीत कौर ने याचिका दायर की थी। उन्होंने अदालत के फैसले पर खुशी जताई है। गुरजीत कौर ने अदालत में दायर याचिका में कहा था कि सन 2000 में रेलवे लाइन बिछाने के लिए रेलवे ने जमीन एक्वायर करने की प्रक्रिया शुरू की थी।
सर्वे व जमीन की निशानदेही के बाद रेलवे ने 2001 में जमीन का अवॉर्ड घोषित किया था। इस दौरान प्रति एकड़ जमीन के बदले किसान को चार लाख रुपये दिए थे। इस बीच किसान गुरजीत कौर ने मुआवजे को कम बताया। साथ ही मुआवजा राशि का विरोध किया था। इसके बाद वह मामले को अदालत ले गईं।
2006 में अदालत ने जमीन की प्रति एकड़ मुआवजा राशि बढ़ाकर पांच लाख 20 हजार रुपये कर दी। लेकिन अदालत के आदेश को रेलवे ने गंभीरता से नहीं लिया। इसके बाद गुरजीत कौर ने वकील के जरिये दोबारा अदालत में अपील दायर की। अदालत ने किसान के हक में फैसला सुनाते हुए खरड़ रेलवे स्टेशन और ट्रैक को कुर्क करने के आदेश जारी कर दिए।
सात लाख 20 हजार मुआवजा
जानकारी के मुताबिक सनेटा की किसान गुरजीत कौर की चार कनाल जमीन रेलवे ने एक्वायर की थी। इसका मुआवजा अब सात लाख 20 हजार रुपये बनता है। इस मुआवजे को न चुकाने पर कुर्की के आदेश जारी किए गए हैं।
ये सामान होगा कुर्क
खरड़ रेलवे स्टेशन की बिल्डिंग, स्टेशन में रखा सारा सामान, भविष्य में जो प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं। उन सब पर जिला अदालत का यह फैसला लागू होगा।