देश के कुछ राज्यों का एक समाज ऐसा भी है, जहां समाज के लोगों पर कोर्ट-कचहरी और थाने का नहीं, बल्कि समाज की ही अदालत का सिक्का चलता है। हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में बसे समाज के लोग आपस में बैठकर दोषी और निर्दोष का फैसला करते हैं और दोनों पक्षों का भाईचारा बनाने के बाद ही पंचायत का समापन होता है। यह बात है बंजारा समाज की।
प्रदेश में कहीं इस समाज को बंजारा, कहीं बादी तो कहीं बाजीगर के नाम से जाना जाता है। समाज के प्रमुखों की माने तो सदियों से चले आ रहे इस सामाजिक रिवाज के कारण कई उजड़ते घरों को बसाया गया और सैकड़ों परिवारों के बीच दुश्मनी भुलाकर भाईचारा बनाया गया। इस पंचायत की अवहेलना करने वाले से समाज अपना रिश्ता तोड़ लेता है, जिससे उसे खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
समाज के लोग भी कोर्ट-कचहरी और थाने की बजाय समाज की पंचायत पर अटूट विश्वास रखते हैं। वे आपसी विवाद को समाज की पंचायत में निपटाने में कभी हिचकिचाहट नहीं करते। मामला चाहे शादी के बाद पति-पत्नी के आपसी विवाद का हो, आपसी रंजिश हो या हत्या हर छोटे-बड़े विवाद को निपटाने के बाद ही पंचायत का समापन होता है। जो पंचायत आपसी विवाद को निपटाने के लिए बुलाई जाती है, उसे उनकी भाषा में गंगा कहा जाता है और इसका अपमान करने की समाज के किसी आदमी ने आज तक साहस नहीं दिखाया है।
पंचायत के बुलावे पर पहुंचते हैं लोग
पंचायत
- फोटो : डेमो फोटो
पूर्वजों की तरफ से वर्षों पहले सामाजिक ताने-बाने को बनाए रखने की चलाई गई यह परंपरा आज भी कायम है। जब भी पंचायत होती है तो एक ही बुलावे पर हरियाणा समेत पंजाब, राजस्थान और दिल्ली इलाकों में रहने वाले समाज के मुखिया और पंच संबंधित जगह पर पहुंच जाते हैं।
खुले मैदान में होनी वाली इस पंचायत में सभी की सुनवाई होती है और ये लोग अंत में जो भी फैसला सुनाते हैं, वह मान्य होता है। इसकी अवहेलना करने वालों से समाज अपना नाता तोड़ लेता है, जिसके बाद उसे समाज से नाता जोड़ने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता। दोषी को सजा के अनुरूप दंडित करने के अलग-अलग नियम हैं और उसे संबंधित को हर हाल में मानना पड़ता है।
अपने जीवन में मैंने समाज के कई परिवारों के बीच मनमुटाव दूर किए और कई उजड़े परिवारों को बसाया भी। समाज के निर्णय का सभी पूरी तरह से मान-सम्मान करते हैं, चूंकि समाज की पंचायत का मकसद दोनों पक्षों के मतभेद दूर करना होता है।
- गुलाब सिंह लुदास, जिला प्रधान हिसार
हमारे समाज की पंचायत में आज तक ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया, जिससे दोषी पक्ष को भी शर्मिंदा होना पड़े। धीरे-धीरे समाज अब सामाजिक जागरूकता पैदा करने पर भी विचार कर रहा है। इसमें बाल विवाह, महिला शिक्षा, दहेज प्रथा आदि बुराइयों के प्रति समाज को जागरूक किया जा रहा है।
- जंगबीर सिंह, जिला प्रधान भिवानी