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कोठी कांड : अपने खाते में राहुल का नाम जुड़वाने आया था खलिंदर सिंह

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चंडीगढ़। सेक्टर-37 स्थित करोड़ों की कोठी कब्जाने के मामले में मंगलवार को जिला अदालत में दो अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए गए। गवाह आकांक्षा रस्तोगी ने अपने बयान में बताया कि वह यूनियन बैंक में असिस्टेंट मैनेजर है। सेक्टर-8 ब्रांच में खलिंदर सिंह कादियान पहले से ही खाताधारक था। 11 फरवरी 2019 को खलिंदर ने एक बचत खाता खुलवाया। लगभग 10 दिन बाद खलिंदर एक अन्य व्यक्ति के साथ बैंक आया और उसका नाम राहुल मेहता बताया। खलिंदर ने अपने खाते को ज्वाइंट अकाउंट बना कर राहुल मेहता का नाम जोड़ने की बात कही। बैंक नियमों के हिसाब से ज्वाइंट अकाउंट खोलने का फॉर्म दिया गया। इसमें प्राथमिक खाताधारक के रूप में खलिंदर ने अपने दस्तावेज पेश करते हुए हस्ताक्षर किए।
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द्वितीय खाताधारक के रूप में राहुल मेहता के मूल केवाईसी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड दिखाकर उनकी कॉपी जमा किए। इसका सत्यापन करने के बाद उन्होंने सभी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर दिए। इसके बाद उस खाते को ज्वाइंट अकाउंट कर दिया गया। जब करोड़ों की कोठी कब्जाने के मामले में बैंक में पुलिस इंस्पेक्टर ने आकर पूछताछ की तो बताया कि जो व्यक्ति राहुल मेहता बनकर आया था, वह राहुल नहीं था। इसके बाद इंस्पेक्टर उस बैंक खाते की जानकारी ले कर चले गए।
दूसरे गवाह व्यास चावला ने अपने बयानों में बताया कि वह एक प्रॉपर्टी डीलर है। उसका ऑफिस पहले सेक्टर-37 में था। लॉकडाउन के दौरान उसने ऑफिस मोहाली में बना लिया। वह शराब कारोबारी अरविंद सिंगला को पहले से जानता था। 28 फ़रवरी 2019 को अरविंद सिंगला और विजय नरूला ने उसे फ़ोन किया। उन्होंने सेक्टर-37 में एक प्रॉपर्टी को बेचने की बात की। एक मार्च 2019 को उन्होंने व्यास को तहसील ऑफिस में बुलाया। जहां उसे अरविंद सिंगला, विजय नरूला, संजीव महाजन, अशोक अरोड़ा, सतपाल डागर, खलिंदर कादियान और टोपी पहने हुए व्यक्ति मिला। टोपी वाले व्यक्ति का नाम राहुल मेहता बताया गया। प्रॉपर्टी के खरीदार मनीष गुप्ता थे, जो उस समय वहां मौजूद नहीं थे। वहां उपस्थित सभी लोग आपस में कुछ बात कर रहे थे। घर से फ़ोन आने पर वह वहां से चला गया।
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