साहित्य संस्था ‘मंथन’ की ओर से सेक्टर -52 गीता भवन मंदिर में स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में कवि दरबार का आयोजन किया गया। जय गोपाल ‘अश्क’ ने अध्यक्षता की, मुख्य अतिथि दर्शन वासन थे जबकि विशेष अतिथि केरूप में श्याम सिंह ‘श्याम’ उपस्थित रहे। मंच संचालन गजलकार डा. सुशील ‘हसरत’ नरेलवी ने किया।
कवि दरबार का शुभारंभ कवयित्री जिज्ञासा की कविता ‘रक्षक’ से हुआ। चमन शर्मा ‘चमन’ ने अपनी कविता ‘आज़ादी किसे मिली’ में देश की अव्यवस्था को रेखांकित किया तो डा. उर्मिला कौशिक ‘सख़ी’ ने सावन को लेकर अपनी गज़ल में पिया से मनुहार पेश की- ‘ज़रा सुन लो सजन तुमसे ज़माने भर के शिकवे हैं/तिरे परदेशी होने से मेरे बेरंग सपने हैं’।
कवि दीपक खेतरपाल ने कविता ‘वर्षगांठ’ में देशभक्ति का कोरा ढिंढोरा पीटने वालों पर कटाक्ष किया। कवि प्रेम विज व शायर बलबीर बाहरी ‘तन्हा’ भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि महोदय दर्शन वासन ने अपने व्यक्तव्य में कहा कि सभी कवियो की कविताओं, गजलों व गीतों में विचार व विषय का सुन्दर ताना-बाना देखने को मिला। अंत में, संस्था के महासचिव दीपक खेतरपाल ने सभी का आभार प्रकट किया।