जम्मू कश्मीर के कठुआ में बच्ची के साथ हुए जिस कांड ने देश भर की जनता को झकझोर दिया था, उसका आरोपी तिलक राज कहता है कि उसे झूठा फंसाया जा रहा है। मामले की सुनवाई इन दिनों पंजाब में पठानकोट की अदालत में चल रही है। जिला तथा सत्र न्यायाधीश डॉ. तेजविंदर सिंह की अदालत में पेशी के लिए सभी आरोपियों को गुरदासपुर जेल से पठानकोट लाया गया। मामले में सांझी राम, उसके बेटे विशाल जंगोत्रा, पुलिस मुलाजिम तिलक राज, आनंद दत्ता, एसपीओ दीपक खजूरिया, सुरेंद्र कुमार और परवेश कुमार को आरोपी बनाया गया है।
मामले के छठे आरोपी तिलक राज को कोर्ट में पेश किया गया। वीरवार को गवाह नंबर-96 से लेकर गवाह नंबर-114 तक के बयान के आधार पर आरोपी से कुल 100 सवाल पूछे गए। करीब पांच दिन चली इस जिरह के दौरान आरोपी से कुल 400 सवाल पूछे गए। सुनवाई के बाद आरोपी तिलक राज ने सभी आरोपों को नकार दिया। उसने कहा कि उस पर लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद हैं। उसे झूठा फंसाया जा रहा है।
ये है मामला
जम्मू के कठुआ में 10 जनवरी 2018 को 8 साल की बच्ची लापता हो गई थी। 7 दिनों बाद उसकी लाश क्षत-विक्षत हालत में मिली। मामले में सात आरोपी हैं- मंदिर का संरक्षक सांझी राम, उसका बेटा विशाल और नाबालिग भतीजा, एसपीओ सुरेन्द्र कुमार, विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजूरिया, सब इंस्पेक्टर आनंद दत्ता, सांझी राम, हेड कांस्टेबल तिलक राज और प्रवेश कुमार।
गांव रसाना में बच्ची अपने परिवार के साथ रहती थी। बच्ची खानाबदोश मुस्लिम समुदाय से थी। उस बकरवाल समुदाय से, जो कठुआ में अल्पसंख्यक है। 10 जनवरी को घोड़ों को चराने के लिए आसपास के जंगलों में निकली बच्ची घर नहीं लौट पाई। बच्ची के पिता मोहम्मद यूसुफ ने 12 जनवरी को हीरानगर थाने में शिकायत दर्ज कराई।
हफ्ते भर तक कोई खोज-खबर नहीं मिलने के बाद 17 जनवरी को जंगल में बच्ची की लाश मिली थी। इस घटना ने देश भर को हिलाकर रख दिया था। घटना के विरोध में लोग सड़कों पर उतर आए थे और आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की गई। फिलहाल केस कोर्ट में विचाराधीन है और बच्ची के लिए न्याय की आस लगाए बैठे हैं परिजन और देशवासी।