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कठुआ केस में चौंकाने वाला खुलासा, आरोपी मन्नू का आरोप- मुझे जम्मू की चौकी में पीटा गया

Tue, 10 Jul 2018 03:49 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, पठानकोट
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आरोपी को कोर्ट में पेश किया - फोटो : amar ujala
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बहुचर्चित कठुआ दुराचार और हत्या मामले में खुद को नाबालिग बताने वाले आरोपी प्रवेश कुमार उर्फ मन्नू ने कोर्ट में पुलिस पर चौंका देने वाला आरोप लगाया है। मन्नू ने कहा कि 22 तारीख को उसकी हड्डियों की जांच होनी थी, लेकिन 23 जून को क्राइम ब्रांच वाले उसे कठुआ जेल से जम्मू के किसी थाने की चौकी में ले गए और उसके साथ मारपीट की।
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इस दौरान स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम के सभी सदस्य मौजूद थे, जिन्होंने कहा कि जो हम कहेंगे, वही तुम्हें कहना है। इसके बाद वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई। बचाव पक्ष के वकील एके साहनी ने बताया कि इस संबंध में स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम के सदस्यों को सोमवार को हलफिया बयान दायर करने को कहा गया था। जिन्होंने माना कि वह 23 जून को आरोपी को लेकर जम्मू गए थे, लेकिन मारपीट नहीं की। इस पर सेशन जज पठानकोट ने डीजीपी को स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने को कहा।

वकील साहनी ने मीडिया से कहा कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर के गवर्नर तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम तथा क्राइम ब्रांच की कार्यप्रणाली की सीबीआई से जांच कराई जाने की मांग की है। साहनी ने कहा कि स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम तथा अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में मीडिया कवरेज पर पाबंदी के लिए आवेदन दिया था, जिसे न्यायालय ने खारिज कर दिया है।
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कठुआ कांड: पुलिस को आठ हफ्ते में चार्जशीट दायर करने का निर्देश

आरोपी को कोर्ट में पेश किया
सुप्रीम कोर्ट ने कठुआ गैंगरेप व हत्या मामले में सोमवार को कई अहम आदेश जारी किए। शीर्ष अदालत ने इस मामले में जम्मू एवं कश्मीर पुलिस को आठ हफ्ते के भीतर पूरक चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही पीठ ने एक बार फिर दोहराया कि कहा कि ट्रायल बंद कमरे में होगी। पीठ ने ट्रायल कोर्ट को इसके लिए पर्याप्त इंतजाम करने के लिए कहा है। मालूम हो कि पिछली सुनवाई में शीर्ष अदालत ने इस मामले का ट्रायल कठुआ से पठानकोट की अदालत में ट्रांसफर कर दिया था।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने असाधारण परिस्थिति का हवाला देते हुए आरोपियों को कठुआ जेल से गुरुदासपुर जेल में ट्रांसफर करने का आदेश दिया है। पीठ ने आरोपियों के वकील और केंद्र सरकार की उस दलील को नकार दिया कि बिना आरोपियों को पक्ष सुने ऐसा नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि आरोपियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में किसी भी अदालत को कोई अन्य याचिका पर सुनवाई न करने का निर्देश दिया था।

अपने इस फैसले में संशोधन करते हुए पीठ ने कहा कि ट्र्रायल कोर्ट के फैसले से असंतुष्ट होने पर दोनों पक्ष पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं। सुनवाई के दौरान जम्मू एवं कश्मीर पुलिस ने पीठ को सीलबंद लिफाफ में जांच की स्थिति रिपोर्ट सौंपी। राज्य पुलिस की ओर से पेश वकील ने कहा कि जांच का काम जारी है और पूरक चार्जशीट भी दाखिल की जाएगी। उन्होंने बताया कि छह से आठ हफ्ते में पूरक चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी। इस पर पीठ न राज्य पुलिस को आठ हफ्ते में चार्जशट दाखिल करने का आदेश दिया है।

पीठ ने ट्रायल जज और अभियोजन अधिकारियों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने के लिए कहा है। पीठ ने सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि अगर परिजन आरोपियों से मिलना चाहते हो तो वह इसकी व्यवस्था कराए।
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आरोपियों को जेल ट्रांसफर का नोटिस नहीं

आरोपी को कोर्ट में पेश किया
सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल मनिंदर सिंह ने कहा कि आरोपियों को एक जेल से दूसरी जेल में ट्रांसफर करने से पहले नोटिस दिया जाना चाहिए। आरोपियों को कठुआ जेल से गुरदासपुर जेल में ट्रांसफर करने के मामले में निष्पक्षता नहीं बरती गई है। आरोपियों को इसमें अपना पक्ष रखने का एक मौका मिलना चाहिए। कुछ आरोपियों के वकील ने कहा कि परिजनों के लिए गुरदासपुर जेल जाना मुश्किल हो जाएगा।

बंद कमरे में होगी सुनवाई
पीठ ने कहा कि पठानकोट जिला एवं सत्र अदालत में सुनवाई के दौरान सिर्फ जज, आरोपियों के वकील, सरकारी वकील और कोर्ट स्टाफ ही मौजूद रहेंगे। सुनवाई बंद कमरे में होगी। वरिष्ठ वकील शेखर नाफडे ने आरोप लगाया कि अदालत कक्ष में आरोपियों इतने सारे वकीलों की मौजूदगी से निष्पक्ष सुनवाई में दिक्कत आती है।

बयान दर्ज करने आने वाले गवाहों को भी इससे खतरा महसूस होता है। इस मामले में कम से कम 50 वकील आरोपियों का बचाव कर रहे हैं। उन्होंने अपील की कि अदालत को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये आरोपियों का बयान दर्ज करना चाहिए। इस पर पीठ ने कहा कि वीडियो कांफ्रेंसिंग की जरूरत नहीं है।
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