कठुआ दुष्कर्म और हत्या मामले के आरोपियों को हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली। वहीं कहा जा रहा है कि डीजीपी क्राइम ब्रांच हत्याकांड के मास्टरमाइंड के खिलाफ चालान पेश नहीं कर रहे। कठुआ दुष्कर्म और हत्या के मामले में वीरवार को 32 से 35वें गवाहों के बयान पर बहस हुई।
बचाव पक्ष का कहना है कि अगर इसी तेजी के साथ गवाहों के बयान दर्ज होते रहे तो जल्द ही केस का निपटारा हो जाएगा। वहीं मास्टरमाइंड की ओर से सुप्रीम कोर्ट में लगाई हैबियस कॉरपस पिटीशन पर बचाव पक्ष के वकील एके साहनी ने कहा कि इसके साथ सांबा थाने में मारपीट नहीं की गई, बल्कि इसने खुद सुसाइड की कोशिश की थी।
इस संबंध में जांच शुरू हो गई है। इसके खिलाफ धारा 164 सहित अन्य बयान मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए गए हैं, जो बच गए हैं वो शनिवार को रिकॉर्ड हो जाएंगे। मास्टरमाइंड ने सुसाइड की कोशिश की और मारपीट का ड्रामा रचा है, ताकि सुप्रीम कोर्ट में जा सके।
साहनी ने कहा कि ऐसे हिस्ट्रीशीटर, जिस पर 307 के मामले दर्ज हैं, जिसमें इसने पुलिस मुलाजिमों तक को पीटा है, उसमें किसी पुलिस अधिकारी ने इसे हाथ नहीं लगाया तो अब उसे कौन पीट सकता है। अब तो यह रेप केस में सांबा पुलिस की कस्टडी में है।
मास्टरमाइंड के खिलाफ चालान पेश नहीं कर रहे डीजीपी
साहनी ने कहा कि मास्टरमाइंड की ओर से हीरानगर थाने पर हमले के संबंध में जो चालान है, डीजीपी उसे कोर्ट में पेश करें। उन्होंने कहा कि पता नहीं क्यों डीजीपी क्राइम ब्रांच इस मास्टरमाइंड को बचाने में लगे हैं, जबकि जहां पुलिस का इंट्रेस्ट हो वहां 10 दिन में इन्क्वायरी पूरी कर ली जाती है। लेकिन इस मामले में वर्षों तक इन्क्वायरी नहीं होगी और न ही चालान पेश किया जाएगा।
उन्होंने हीरानगर थाने पर हमले के मामले की सीबीआई जांच की मांग उठाई। साहनी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में हैबियस कॉरपस मामले में 21 अगस्त को डीजीपी क्राइम ब्रांच को पुलिस का पक्ष रखने खुद जाना चाहिए और मास्टरमाइंड के खिलाफ कॉलेज टाइम से अब तक दर्ज सारी एफआईआर पेश करनी चाहिए।