चंडीगढ़ में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में डॉ. समीरा कौसर एक परफॉर्मेंस में कत्थक डांस का पूरा जीवन दिखा दिया। प्राचीन कला केन्द्र की तरफ से बुधवार को टैगोर थिएटर में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। जिसमें डॉ. समीरा कौसर ने अपनी नई प्रस्तुति ‘कथा कत्थक की’ को रोचक व प्रभावशाली ढंग से कत्थक नृत्य की उत्पति, इतिहास और विस्तार को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया।
समीरा के निर्देशन से सजे इस कार्यक्रम में उनकी 65 शिष्याओं जोकि 4-60 वर्ष की रही ने भी अपनी शानदार प्रस्तुति देकर हाल में बैठे दर्शकों का मन मोह लिया। इस कार्यक्रम में मेयर अरूण सूद ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
मां बेटी की अनोठी युगलबंदी
इस कार्यक्रम की खासियत यह रही कि इसमें कई मां ने अपनी बेटियों ने एक मंच पर एक साथ प्रसतुति देकर खूब तालियां बटोरी। कथा कत्थक की का अरांभ नृत्य नाटिका से हुआ। जिसमें प्राचीन कला केकत्थक नृत्य के जन्म की कथा का नृत्य के माध्यम से वर्णन किया।
कविता द्वार लीलाओं को पेश किया गया
कार्यक्रम के दौरान गणेश के श्लोक ‘गंग गंग गणपतय नम: एक दताएं विदमहे’ पर भक्तिमयी प्रस्तुति दी गई। वहीं कत्थक नृत्य के सम्पूर्ण अंगों की जानकारी नृत्य के माध्यम से पेश की गई। जिसमें कविता द्वारा कृष्ण लीलाओं द्वारा पेश किया गया। कृष्ण की माखन चोरी,छेड़छाड़,होली की सुंदर प्रस्तुतियां दी गई। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए कलाकारों ने ‘बरसत लागी बदरिया झूमझूम के’ पेश करके दर्शको को मंत्रमुग्ध कर दिया।
लखनऊ और बनारस घराने की पेशकश
कार्यक्रम में लखनऊ घराने की पेशकश में ठुमरी,दादरा,गजल एवं तराना की जिसमें ठुमरी में खंडिता नायिका के पीड़ा का मार्मिक प्रदर्शन किया गया। इसके बाद दादरा में ‘रंगी सारी गुलाबी चुनरिया’...पेश किया गया। इस गुलाबी प्रस्तुति के बाद गजल आज जाने की जिद न करो’ प्रस्तुत किया गया।
वहीं कार्यक्रम के अंतिम चरण में बनारस घराने के कत्थक नृत्य की प्रस्तुति दी गई। जिसमें शुद्ध पांरम्परिक नृत्य पेश किया गया। इसके बाद सूफी कलाम दमादम मस्त कलंदर ने पर कलाकारों ने जबरदस्त प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के अंत में प्राचीन केन्द्र की रजिस्ट्रार और सचिव सजल कौसर ने कलाकारों को सम्मानित किया।