करतारपुर कॉरिडोर से प्रतिदिन पांच हजार श्रद्धालुओं को बिना वीजा सातों दिन गुरुद्वारा साहिब के दर्शन कराने के लिए पाकिस्तान राजी हो गया है। यह सहमति वाघा बॉर्डर पर रविवार को भारत-पाक के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में बनी।
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पाक इस बात पर भी राजी हो गया है कि विदेशों में बसे ओसीआई कार्ड होल्डर भारतीय भी गुरुद्वारा साहिब के दर्शनों के लिए इस रास्ते का इस्तेमाल कर सकेंगे। विशेष अवसरों पर दस हजार श्रद्धालुओं को दर्शन की मांग पर पाकिस्तान ने कहा कि कॉरिडोर की क्षमता को देखते हुए इस पर सोच समझकर आगे निर्णय लिया जाएगा।
गुरुद्वारा करतारपुर साहिब के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालु वर्ष के किसी भी दिन सूर्योदय से सूर्यास्त होने तक आ-जा सकते हैं। यह श्रद्धालुओं की इच्छा पर निर्भर करेगा कि वह करतारपुर गलियारे से पैदल जाना चाहते हैं या किसी वाहन पर।
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बैठक के बाद वतन लौटते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव एससीएल दास ने अटारी सीमा पर पत्रकारों से बातचीत की। इसमें उन्होंने कहा कि पाक ने रावी नदी पर पुल बनाने की मांग को स्वीकार कर लिया है। भारत ने मांग रखी थी कि डेरा बाबा नानक के साथ बहने वाले रावी दरिया में संभावित बाढ़ को देखते हुए पाकिस्तान भी एक पुल का निर्माण करे।
उल्लेखनीय है कि बैठक में हिस्सा लेने के लिए पाक के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता डॉ. मोहम्मद फैजल की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल रविवार सुबह सीमा पर पहुंचा था। भारत की ओर से विदेश मंत्रालय से एससीएल दास, संयुक्त सचिव (आंतरिक सुरक्षा) और दीपक मित्तल, संयुक्त सचिव (पीएआई यानी पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान) प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता के लिए पहुंचे थे।
बाद में फैजल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया कि दोनों देशों के बीच सकारात्मक बातचीत हुई, जिसमें से करीब 80 फीसदी मुद्दों पर सहमति बनी। उन्होंने कहा, बाकी 20 फीसदी मुद्दों को अगली बैठक में सुलझाने की कोशिश होगी।
गलियारे का भारत विरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल नहीं होने देंगे
भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान को स्पष्ट कर दिया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा उनके लिए सबसे जरूरी है, इसलिए करतारपुर गलियारे को आतंकवाद मुक्त क्षेत्र घोषित किया जाए। भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया कि पाक ने हमारे प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया है कि वह किसी तरह की भारत विरोधी गतिविधियों के लिए गलियारे का इस्तेमाल नहीं होने देगा।
करतारपुर साहिब में एक कांसुलेट स्थापित करने की मांग
दिल्ली सिख गुरुद्वारा कमेटी द्वारा प्रकाश पर्व के मौके पर दिल्ली से ननकाना साहिब तक निकाले जाने वाले नगर कीर्तन को अनुमति व श्रद्धालुओं की सुरक्षा की मांग को पाकिस्तान ने स्वीकार कर लिया है। भारतीय शिष्टमंडल ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा में कोई भी चूक न होने की बात रखी। साथ ही कहा कि पाकिस्तान सरकार गुरुद्वारा करतारपुर साहिब के पास भारत सरकार को एक कांसुलेट स्थापित करने की मंजूरी दे, ताकि दर्शनों के लिए आने वाले किसी भी श्रद्धालु को यदि कोई मुश्किल पेश आए तो वह भारतीय अधिकारियों से संपर्क साध सके।
गुरुद्वारा साहिब की जमीन को कब्जा मुक्त किया जाए
भारत ने मांग की कि गुरुद्वारा करतारपुर साहिब की नजदीकी जमीनों को कब्जों से मुक्त करवाया जाए, ताकि उस पवित्र जमीन का दुरुपयोग न हो। पाकिस्तान ने कहा कि उस जमीन पर तीन सरकारी विभागों का कब्जा है, पर उसे जल्द खाली करवा लिया जाएगा। एससीएल दास ने कहा कि डेरा बाबा नानक से लेकर इंटरनेशनल बॉर्डर तक सड़क व रोड डिवाइडर का काम सितंबर तक समाप्त कर दिया जाएगा। कॉरिडोर का निर्माण 31 अक्तूबर तक पूरा हो जाएगा। 12 नवंबर को प्रकाश पर्व पर इस कॉरिडोर को खोल दिया जाएगा। एक प्रश्न के उत्तर में दास ने कहा कि इस बैठक में कॉरिडोर के उद्घाटन की तारीख व उसमें दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के शामिल होने की बारे में कोई चर्चा नहीं हुई। डेरा बाबा नानक में निर्माणाधीन कॉरिडोर का वीडियो भी दिखाया गया।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान में शरण लिए व वहां बैठकर भारत विरोधी व खालिस्तानी गतिविधियों को चलाने वाले आतंकी संगठनों की जानकारी पर एक डोजियर (दस्तावेज) सौंपा। डोजियर में पाक में बैठे खालिस्तानी आतंकियों के साथ पीएसजीपीसी के पूर्व महासचिव गोपाल चावला की भी जानकारी दी गई।
भारत सरकार की ओर से अमेरिका से संचालित सिख फॉर जस्टिस पर लगाए प्रबंध का नोटिफिकेशन भी पाकिस्तान को सौंपा गया। एससीएल दास ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पाकिस्तान को साफ कर दिया कि भारत आतंकवाद के मुद्दे पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करता है। पाकिस्तान सरकार भी सिख फॉर जस्टिस की गतिविधियों को रोके।
30 सितंबर तक करतारपुर साहिब के लिए 4 लेन का हाईवे तैयार
केंद्र सरकार ने बताया कि करतारपुर साहिब जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए चार लेन का हाईवे गुरदासपुर-अमृतसर रोड 30 सितंबर तक बनकर तैयार हो जाएगी, जो अंतरराष्ट्रीय सीमा को जोडे़गा। 4.19 किमी लंबा यह हाईवे 120 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा है।
कॉरिडोर का उद्देश्य ही ‘कॉरिडोर फॉर पीस’
डॉ. फैसल ने इस बात को स्वीकार किया की भारतीय शिष्टमंडल ने उन्हें एक डोजियर सौंपा है। इस डोजियर की डिटेल देने से इंकार करते हुए डॉ. फैसल ने कहा कि पाकिस्तान सरकार ने भी भारत सरकार को 12 डोजियर सौंपे हुए हैं। अब तक भारत सरकार ने इन डोजियर का कोई भी उत्तर नहीं दिया है। कॉरिडोर का उद्देश्य ही ‘कॉरिडोर फॉर पीस’ है। करतारपुर कॉरिडोर का निर्माण करके पाकिस्तान सरकार ने शांति का पौधा लगा दिया है।