संत एकादशी पर पहला स्नान इसलिए करते हैं क्योंकि साधु अपनी जिंदगी में जो तप करते हैं, स्नान करने से उस तप की शक्तियां सरोवरों के पानी में मिल जाती हैं। इससे इन सरोवरों में स्नान करने का महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है। कपालमोचन का न सिर्फ हरियाणा बल्कि पूरे देश में अपना अलग महत्व है।
कपालमोचन ऋषि मुनि व तपस्वियों की धरती रही हैं। साधु संतों के अलावा भागवान शिव, श्री राम, पांडवों व श्री गुरु गोबिंद सिंह और श्री गुरु नानक देव जी ने यहां पर कदम रखकर इस धरती को पवित्र किया है। इस मौके पर बलजिन्द्र दास, शोभा दास, गुरमुख दास, अभी राम दास, कमल दास, नैब दास, नारायण दास, दर्शन दास, स्वर्ण दास सहित अनेक साधु संत मौजूद रहे।
मुख्य मेला प्रशासक व डीसी मुकुल कुमार ने कपाल मोचन-श्री आदि बद्री मेला में लगाई गई प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इसे प्रशासनिक स्तर पर कपालमोचन मेले का औपचारिक उद्घाटन भी बताया गया। डीसी कपाल मोचन, बद्री नारायण, माता मन्त्रा देवी व केदारनाथ मंदिर धार्मिक एवं पूजा स्थल बोर्ड के मुख्य प्रशासक भी हैं। इस प्रदर्शनी स्थल में सरकारी विभागों सहित अन्य स्वयं सेवी संस्थाओं द्वारा 33 स्टाल लगाए गए हैं।
प्रदर्शनी स्थल के बीचों बीच सांस्कृतिक कार्यक्रम मंच की स्थापना की गई है। जहां से सूचना, जन संपर्क एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग हरियाणा की ड्रामा पार्टियों एवं भजन पार्टियों के कलाकार दिन व रात के समय यात्रियों एवं श्रद्धालुओं का गीतों-भजनों आदि के माध्यम से मनोरंजन कर रहे हैं। इसके साथ विकास गीतों के माध्यम से सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों, योजनाओं तथा पूर्ण हुए विकास कार्यों व प्रगति पर निर्माण कार्यों की जानकारी भी दी जा रही है।
मेले के उद्घाटन पर विभिन्न सरकार एवं गैर सरकारी शिक्षण संस्थाओं के छात्र-छात्राओं ने भी धार्मिक गीतों व नृत्य की प्रस्तुति दी। डीसी ने कहा कि विभिन्न विभागों द्वारा स्टाल लगाने का उद्देश्य यह है कि लोग मेला में अपनी धार्मिक आस्था के साथ-साथ सरकार की योजनाओं एवं विकास कार्यों की जानकारी भी लें सके। इस मौके पर अतिरिक्त उपायुक्त केके भादू, मेला प्रशासक एवं एसडीएम गिरीश कुमार, जिला राजस्व अधिकारी अभिषेक, डीएसपी आशीष चौधरी, मेला अधिकारी एवं बीडीपीओ नरेंद्र कुमार, श्राइन बोर्ड के सदस्य आदि मौजूद रहे।