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अष्टमी आज नवमी कल

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चंडीगढ़। चैत्र नवरात्रि की अष्टमी एक अप्रैल बुधवार को है। 31 मार्च मंगलवार की रात को 3 बजकर 51 मिनट से अष्टमी प्रारंभ होकर एक अप्रैल बुधवार की रात 3 बजकर 40 मिनट तक है। भारतवर्ष में चार नवरात्र होते हैं। चैत्र, आषाढ़, अश्विन और माघ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तिथि तक नवरात्र होता है। इसमें चैत्र के नवरात्र को बासंती नवरात्र करते हैं।
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अष्टमी के दिन महागौरी की पूजा होती है। यह पूजा दिन में होती है। अष्टमी की रात को महानिशा की पूजा होती है। यह कहना है सेक्टर 30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र का।
बीरेंद्र नारायण मिश्र ने कहा कि कुमारी कन्या का पूजन नवरात्र का अनिवार्य अंग है। यदि समर्थ हो तो 9 दिनों तक 9 कन्याओं का पूजन करें। अन्यथा 7, 5, 3 और एक कन्या को देवी मानकर पूजा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आपत्ति काल में जरूरी नहीं कि 9 कन्याओं का ही पूजन किया जाए। शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि देश में यदि विपत्ति आ जाए, दुश्मन का आक्रमण हो या महामारी इत्यादि जैसी स्थिति उत्पन्न हो तो ऐसी परिस्थिति में मां गौरी का पूजन करना चाहिए। एक कन्या को भोजन कराने से ही पूजन का फल प्राप्त होता है।
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देवालय पूजक परिषद के कोषाध्यक्ष और सेक्टर अठारह स्थित श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि यदि कन्या भी न मिले तो मां भगवती की आराधना करें उन्हें पुष्प व अक्षत चढ़ाकर पूजन कर लें तो भी कन्या पूजन का फल मिलता है।
कन्या पूजन का शुभ मुहुर्त
बीरेंद्र नारायण मिश्र के अनुसार अष्टमी के दिन बुधवार को सूर्योदय से लेकर दोपहर 12 बजे तक कन्या पूजन करने का मुहूर्त है। इसके बाद दोपहर 1.30 बजे से लेकर 3 बजे तक पूजन करें। अष्टमी के दिन दोपहर 12 बजे से लेकर दोपहर 1.30 बजे तक राहुकाल है। राहु काल में पूजा करना अशुभ माना गया है। नवमी के दिन सूर्योदय से लेकर 12 बजे तक कन्या पूजन और हवन का शुभ मुहूर्त है। महानिशा पूजा में साबर मंत्र और यंत्र-मंत्र-तंत्र सिद्धि के लिए पूजा होती है।
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