कालका-शिमला ट्रैक पर टॉय ट्रेन के एक्सीडेंट की जांच रिपोर्ट आ गई है। इसमें हादसे को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ। अधिकारियों ने जांच रिपोर्ट सौंप दी है।
बताया जा रहा है कि परवाणु के पास चार्टर्ड टॉय ट्रेन स्पीड अधिक होने के कारण पटरी से उतरी थी। रेलवे सेफ्टी कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दुर्घटना के समय ट्रेन की स्पीड 40 किमी प्रति घंटे थी जबकि 25 किमी प्रति घंटे होनी चाहिए थी।
ट्रेन का स्पीडोमीटर खराब था इसके कारण ड्राइवर को यह पता नहीं चला कि गाड़ी कितनी स्पीड में दौड़ रही है।
25 होनी चाहिए, 40 की स्पीड से दौड़ रही थी
जांच अधिकारी नार्दर्न रेलवे सेफ्टी कमिश्नर एसके पाठक ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अधिक स्पीड होने के कारण ट्रेन पटरी से उतर गई और उसके डिब्बे डैमेज हो गए। कालका-शिमला ट्रैक पर ट्रेन की स्पीड 25 किमी प्रति घंटा होनी चाहिए। लेकिन दुर्घटना के समय उसकी स्पीड 40 किमी थी।
अंबाला डिवीजन के डीआरएम दिनेश कुमार ने बताया कि इस मामले में रेलवे के तीन कर्मचारियों को सस्पेंड किया जा चुका है। फाइनल रिपोर्ट के बाद ही यह निश्चित हो पाएगा कि इसमें पूरी तरह से दोषी कौन है।
गत 12 सितंबर को हुआ था हादसा, 3 की मौत
गत 12 सितंबर को कालका से शिमला जा रही चार्टर्ड टॉय ट्रेन परवाणू के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इसमें ब्रिटेन के तीन पर्यटकों की मौत हो गई और दस अन्य घायल हो गए थे। इस ट्रेन में ब्रिटेन के 37 पर्यटक शिमला जा रहे थे।
इससे पहले हो चुके हैं हादसे
वर्ष 2008 में यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड हेरिटेज घोषित किए गए शिमला-कालका रेलवे ट्रैक पर जुलाई 2010 में कोटी के निकट भी हादसा हो चुका है। इस हादसे में इंजन के पटरी से उतर जाने के कारण एक व्यक्ति घायल हो गया था।
इसी तरह दिसंबर 2008 में कालका-शिमला हॉली डे स्पेशल ट्रेन के तीन डब्बे पटरी से उतर गए थे। इसमें एक यात्री की मौत हो गई थी जबकि छह घायल हुए थे।