चाहे गीता बांछिये या पढ़िए कुरान, मेरी-तेरी प्रीत ही हर पुस्तक का ज्ञान, रंग दे नी, रंग दे नी... गीत के साथ ही सूफी गायक कैलाश खेर ने मदहोश कर देने वाली आवाज से रोज फेस्टिवल की दूसरी शाम की शुरूआत की।
इस प्रस्तुति से कैलाश खेर ने युवाओं के मूड के साथ ही माहौल में रुमानियत भर दी। लेकिन, इसके बाद उन्होंने माहौल बदला और बम लहरी... गीत के साथ ही युवाओं में जोश भरा।
कैलाश खेर ने भी लोगों के मूड को भांपते हुए एक के बाद एक गाने गाए। इस पर वहां मौजूद लोग झूम उठे। बीच-बीच में उन्होंने चंडीगढ़ वासियों से उनके साथ ही गीत गाने को कहा।
साथ ही उनसे पंजाबी में बात करने की कोशिश की। इस पर श्रोताओं ने उनसे उनके गाए कुछ फेमस गीत गाने की गुजारिश की। इस पर कैलाश भी ना नहीं कह सके।
उन्होंने पिया के रंग रंग दे नी, रंग दे नी, तू जाने ना, या रब्बा दिल कोई तोड़े ना... समेत कई गीत गाए। इसके अलावा उन्होंने नुसरत फतेह अली खान साहब का गाया हुआ गीत ‘जानिया’ भी गाया।
अमर उजाला फोटोग्राफी कांटेस्ट
अमर उजाला फोटोग्राफी कांटेस्ट आयोजित करने जा रहा है। इसमें जिन लोगों ने रोज फेस्टिवल में फ ोटो ख्ंिाचे हैं वह अपनी एंट्री भेज सकते हैं।
अगर आपको लगता है कि आपकी खींची हुई फोटो दूसरों से अलग है और खास है तो आप 25 फरवरी शाम पांच बजे तक उसे nageshdubey51@gmail.com पर भेज सकते हैं।
इसके अलावा आप हार्ड कापी अमर उजाला कार्यालय, सेकेंड प्लोर, सेक्टर-9डी, चंडीगढ़ पर भी भेज सकते हैं। टॉप थ्री विजेताओं क ो अमर उजाला की ओर से सम्मानित किया जाएगा।