हरियाणा सरकार ने जमीन आवंटन में धांधली की जांच को लेकर जस्टिस ढींगरा की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया था।
15 महीने पहले बीते वर्ष मई में गठित इस आयोग को गुड़गांव के सेक्टर-83 में हुड्डा सरकार के कार्यकाल में दिए गए सीएलयू एवं कमर्शियल लाइसेंस की धांधलियों की जांच का जिम्मा सौंपा गया था। इसी सेक्टर में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा और डीएलएफ के बीच हुए सौदे वाली विवादित भूमि भी है।
बाद में इस आयोग को गुड़गांव के ही छह अन्य गांवों में भी बिल्डरों द्वारा किए गए जमीन के सौदों की जांच का जिम्मा सौंपा गया था। आयोग का गठन छह महीनों के लिए किया गया था, लेकिन बाद में सरकार ने चार बार इसका कार्यकाल बढ़ाया।
जस्टिस ढींगरा 30 जून को ही अपनी रिपोर्ट देने वाले थे, लेकिन एक ई-मेल के जरिए उन्होंने यह कहते हुए 4 सप्ताह का एक्सटेंशन मांग लिया था कि उन्हें कुछ दस्तावेज मिले हैं, जिन्हें जांच में शामिल किए बिना रिपोर्ट कंपलीट नहीं मानी जा सकेगी।
सरकार ने 6 सप्ताह की एक्सटेंशन देने हुए जस्टिस ढींगरा को अपनी रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा था। बुधवार को आयोग का कार्यकाल पूरा हो रहा था, जिसके चलते मंगलवार को भी दिनभर रिपोर्ट सौंपे जाने संबंधी कयास लगते रहे। बुधवार को जस्टिस ढींगरा ने अपनी जांच रिपोर्ट सीएम को सौंप दी है।