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बहिबला कलां कांड पर रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट विधानसभा में पेश, डीजीपी सैनी ने किए कई खुलासे

Tue, 28 Aug 2018 01:50 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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नवजोत सिद्धू
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बहिबल कलां और कोटकपूरा के घटनाक्रम की जांच कर रहे जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट पंजाब विधानसभा में सोमवार को पेश की गई, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को पूरी जानकारी थी। यह बात पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी ने बेअदबी मामलों की जांच के लिए गठित जस्टिस रणजीत सिंह आयोग को दिए अपने बयान में कही है। स्पीकर ने रिपोर्ट पर मंगलवार को दो घंटे बहस कराने का फैसला लिया। इसके साथ ही उन्होंने सदस्यों की मांग स्वीकार करते हुए बहस के टीवी पर लाइव टेलिकास्ट की अनुमति भी दे दी।
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स्पीकर के इस फैसले के बावजूद सदन में रिपोर्ट को लेकर इतना हंगामा हुआ कि कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित करनी पड़ी। आयोग द्वारा चार भागों में राज्य सरकार को सौंपी रिपोर्ट में बेअदबी के विभिन्न मामलों की जांच के बाद न सिर्फ तत्कालीन पुलिस प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है बल्कि पूर्व अकाली-भाजपा सरकार पर भी उंगली उठाई है। रिपोर्ट के भाग एक में पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी के बयान के आधार पर कहा है कि 13/14 अक्तूबर, 2015 की रात दो बजे पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने सुमेध सैनी को फोन कर कोटकपूरा में हालात और उनसे निपटने के लिए उठाए गए कदमों का जायजा लिया।

जस्टिस रणजीत सिंह ने अपनी रिपोर्ट में माना है कि पूर्व मुख्यमंत्री को बरगाड़ी बेअदबी कांड, बहिबल कलां व कोटकपूरा इलाकों में हुई घटनाओं की पूरी जानकारी थी। आयोग ने कॉल डिटेलों और बयानों के आधार पर आशंका व्यक्त की है कि न सिर्फ पूर्व मुख्यमंत्री बल्कि उनके स्पेशल सचिव गगनजीत सिंह बराड़, डीजीपी सुमेध सैनी, आईजी धरमराज सिंह उमरानंगल, कोटकपूरा के तत्कालीन एमएलए मंतार बराड़ को बहिबल कलां गोलीकांड की घटना के बारे में पूरी जानकारी थी। आयोग का कहना है कि घटना वाली रात सभी अफसर और मुख्यमंत्री एक-दूसरे के संपर्क में थे। रिपोर्ट में सैनी का दो पेज का बयान भी नत्थी किया है।
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बादल ने नहीं किया सहयोग
जस्टिस रणजीत सिंह ने कहा है कि पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी के बयान के बाद उनसे और जानकारी भी मांगी गई थी, जो आयोग को नहीं मिली। पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से भी इस बाबत जानकारी मांगी गई थी लेकिन उन्होंने भी कोई सहयोग नहीं दिया।

बरगाड़ी की घटना सोची समझी साजिश का नतीजा थी
जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट के भाग-चार में कहा गया है कि आयोग ने सूबे में बेअदबी के 162 मामलों की जांच की, जिसके लिए आयोग ने करीब एक सौ स्थानों का दौरा कर चश्मदीद गवाहों के बयान दर्ज किए। आयोग का कहना है कि बरगाड़ी और बुर्ज जवाहर सिंह वाला की घटनाएं सोची समझी साजिश का नतीजा थीं। इसके अलावा बठिंडा जिले में गुरुसर, मोगा जिले में मल्लिके की घटनाएं भी गंभीर प्रवृत्ति की थीं। बेअदबी का पहला मामला जहां 14 जुलाई, 2015 को बुर्ज जवाहर सिंह वाला में हुआ। वहीं इस घटना के बाद सितंबर 2016 से दिसंबर 2015 के बीच सूबे में बेअदबी की 60 घटनाएं हुईं। आयोग ने इन घटनाओं को पुलिस की नाकामी करार दिया। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि बेअदबी के मामलों की जांच में आयोग ने एसजीपीसी और श्री अकाल तख्त साहिब के सचिवालय से सहयोग की अपील की थी, लेकिन इन संस्थाओं से उन्हें कोई सहयोग नहीं मिला।

सिद्धू ने मजीठिया को की फ्लाइंग किस
सिद्धू के तेवरों और शब्दावली से नाराज अकाली दल के सदस्य वेल की ओर जाने लगे तो सिद्धू ने बिक्रम सिंह मजीठिया को एक फ्लाइंग किस कर दी। इससे विवाद ओर बढ़ गया। मजीठिया गुस्से में सिद्धू की सीट की तरफ लपके तो सिद्धू भी बाजू तानते हुए आक्रामक मुद्रा में आ गए। दोनों और से तू तू-मैं मैं शुरू हो गई। इस बीच कुछ कांग्रेसी सदस्य बीचबचाव के लिए पहुंच गए और उन्होंने मामला शांत कराया। इस दौरान सदन में भारी शोर के बीच कोई बात सुनी नहीं जा सकी और स्पीकर ने सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी।
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