कुछ ऐसा करो जो दूसरों के लिए प्रेरणा बन जाए। इसी सोच के साथ उषा गर्ग वेस्ट मैटीरियल से उपयोगी वस्तुओं को साकार रूप देने में जुटी हुई हैं। आमतौर वेस्ट मैटीरियल को लोग कू ड़ेदान में फेक देतें है। उन्हीं से वह पिछले कईं सालों से उपयोगी वस्तुएं बना रहीं हैं।
पेशे से शिक्षिका उषा गर्ग ने वातावरण को सुरक्षित रखने के लिए हर्बल गार्डन भी बनाया है। उनके योगदान को देखकर विभाग में लोग उन्हें जूनियर नेकचंद के नाम से बुलाते हैं। सेक्टर 18 स्थित जीजीएसएसएस में उषा गर्ग शिक्षका केरूप में भी स्टूडेंट्स के लिए आदरणीय बनी हुई हैं।
बच्चों को सही तरीके से शिक्षा देना और उनके स्कूल का बेहतर रिजल्ट केलिए यूटी शिक्षा विभाग की ओर से टीचर्स डे पर उन्हें नेशनल अवार्ड देकर सम्मानित किया गया। हिंदी की लेक्चरर उषा गर्ग चूडि़यों, कांच और अन्य टूटी फूटी और खराब वस्तुओं से फ्लावर पॉट, पेटिंग बनाती हैं। वहीं झाडू की तीलियों से गुलदस्ते भी तैयार कर चुकी हैं। अपनी बनाई गई चीजों को वह प्राचीन कला केंद्र में भेज देती हैं।
हर्बल गार्डन तैयार
उषा गर्ग जब सेक्टर 26 स्थित सरकारी स्कूल (पुलिस लाइन) में टीचर थीं तो वहां पर वातावरण को सुरक्षित रखने के लिए 2010 में हर्बल गार्डन बनाया। इसकेबाद 2014 में कैंबवाला में शिक्षिका रहीं तो वहां पर भी हर्बल गार्डन तैयार किया। जिसमें 20 किस्मों के पौधे भी लगाए। इसके साथ ही स्कूल मे भारत का इको फ्रेंडली मैप भी बनाया।
नेक चंद से मिली प्रेरणा
उषा गर्ग ने बताया कि कई बार रॉक गार्डन जाती रही हैं। वहां पर नेक चंद की ओर से वेस्ट मैटीरियल से उपयोगी वस्तुओं को साकार देने से काफी प्रभावित हुईं। उन्हीं से प्ररेणा लेकर वह भी बेकार चीजों को साकार रूप देने में लग गईं।