हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने की धीमी प्रक्रिया व कंपनियों के पास इंफ्रास्ट्रक्चर के अभाव पर हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए हुए चिंता जताई है। हाईकोर्ट ने कहा कि जजों की गाड़ियां भी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट की वेटिंग में हैं, हमे लगता है कि कहीं चालान न कट जाए।
इन प्लेट का इस्तेमाल बस पुलिस द्वारा चालान काटाने के लिए किया जा रहा है। हाईकोर्ट की इस टिप्पणी पर एडिशनल सॉलिसिएटर जनरल ऑफ इंडिया सत्यपाल जैन ने कोर्ट को भारत सरकार और यूटी प्रशासन की ओर से 9 जनवरी तक सरकार का पक्ष रखने का आश्वासन दिया। इसपर हाईकोर्ट ने सुनवाई 9 जनवरी तक टाल दी।
मामले में याचिका दाखिल करते हुए सुप्रीम कोर्ट के वकील स्वतंत्र राय ने हरियाणा में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने का ठप पड़ा काम दोबारा आरंभ करवाने के आदेश जारी करने की अपील की थी।
याची की ओर से दलील दी गई कि हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के कारण अपराध की वारदातों मे कमी आएगी और इसका बहुत अधिक फायदा देखने को मिलेगा। हाईकोर्ट ने इसपर याची से पूछा कि क्या उन्होंने ऐसा कोई मामला देखा है या ऐसा कोई आंकड़ा मौजूद है जहां इस प्लेट की वजह से अपराध रुका हो या अपराधि की पहचान हुई हो।
इस बारे में कोई ठोस जवाब न मिलने पर हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी कंपनी के पास इन प्लेट्स को लगाने के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर तक नहीं है। चंडीगढ़ में तो हाल यह है कि जजों की गाडियां भी इन नंबर प्लेट्स के लिए कतारों में हैं।