जम्मू-कश्मीर में बैठे कुछ नेता अंग्रेजी में ट्वीट तो अच्छे करते हैं लेकिन उनके मन में कुछ और होता है। अनुच्छेद 370 लागू होना दो लोगों, शेख अब्दुल्ला और नेहरू के बीच का समझौता था।
कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए इसे लागू किया गया था, जिसका नुकसान लाखों लोगों ने कई दशकों तक झेला। यह कहना है भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा का। वह सोमवार को जन संपर्क कार्यक्रम के तहत चंडीगढ़ पहुंचे थे।
सेक्टर-33 स्थित भाजपा कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जेपी नड्डा ने कश्मीरी नेताओं पर जमकर हमला बोला। नड्डा ने कश्मीरी नेताओं पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा है कि संविधान निर्माता बाबा भीमराव अंबेडकर को भी अनुच्छेद 370 मंजूर नहीं था। उन्होंने इसका काफी विरोध किया। जवाहर लाल नेहरू के कहने पर शेख अब्दुल्ला ने अंबेडकर से मुलाकात की थी।
उन दोनों की मुलाकात के दौरान अंबेडकर ने शेख अब्दुल्ला से कहा था कि आप हमसे सुरक्षा, खाना सब देने की उम्मीद करते हैं। लेकिन उसके बाद भी भारत की जनता, कश्मीर की जनता नहीं होगी। कानून मंत्री होने के नाते मुझे ये मंजूर नहीं है। लेकिन जवाहर लाल नेहरू अपनी जिद पर अड़े थे, जिसकी वजह से यह समझौता करना पड़ा।
नड्डा ने कहा कि अब तक कश्मीरी नेता उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती और कांग्रेसी नेता गुलाम नबी आजाद यह कहते रहे कि कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा मिला हुआ है, जबकि ऐसा कहीं भी नहीं लिखा था।
उन्होंने कहा कि इस अनुच्छेद के लागू रहने का दुष्परिणाम यह हुआ कि वहां विकास नहीं हुआ। विकास के लिए भेजा गया पैसा भी कुछ लोगों की तिजोरी में चला गया। नड्डा ने कहा कि अनुच्छेद 370 के हटने का मुख्य कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इच्छाशक्ति और भाजपा अध्यक्ष व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रणनीति रही है।
नड्डा ने कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों को आह्वान करते हुए कहा कि अब समय है कि अनुच्छेद 370 आखिर क्या था, क्यों था और इसके हटने से क्या लाभ होगा, इस बारे में लोगों को बताएं। कश्मीर के विकास में भागीदार बनें, वहां शिक्षा, स्वास्थ्य, टूरिज्म व व्यापार के अन्य क्षेत्र को बढ़ावा देना अब हमारी जिम्मेदारी बनती है।