देश की सीमाओं पर दुश्मनों के नापाक मंसूबों को विफल करने के लिए अब ‘संयुक्त सुरक्षा बल संस्कृति’ विकसित करने पर जोर दिया गया है। इसको लेकर भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में और बेहतर तालमेल बैठाने के लिए एक संयुक्त बैठक का आयोजन किया गया। चंडीगढ़ स्थित सेना के मुख्यालय पश्चिमी कमान में हुई बैठक में कई घंटे तक सीमा सुरक्षा और चुनौतियों पर मंथन किया गया।
तालमेल बैठक की अध्यक्षता पश्चिमी कमान के मेजर जनरल देवेंद्र शर्मा एमजीजीएस (ऑपरेशन) ने की। बीएसएफ जम्मू फ्रंटियर के आईजी एनएस जामवाल और आईजी बीएसएफ पंजाब फ्रंटियर आईपीएस सोनाली मिश्रा ने इसमें हिस्सा लिया। बैठक में भारतीय सेना और बीएसएफ के बीच परिचालन दक्षता को और बढ़ाने पर विचार किया गया।
बीएसएफ के प्रशिक्षण और उपकरण प्रोफाइल के मुद्दों समेत सीमा प्रबंधन की चुनौतियां जानी गईं। अधिकारियों ने एक दूसरे से अनुभव और सुझाव भी साझा किए, ताकि और बेहतरी से सुरक्षा की जा सके। मेजर जनरल देवेंद्र शर्मा ने शत्रु को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए एक संयुक्त सुरक्षा बल संस्कृति विकसित करने के महत्व पर प्रकाश डाला। इस दौरान बताया गया कि वर्ष 1965, 1971 के युद्धों और ऑपरेशन पराक्रम के दौरान, भारतीय सेना और बीएसएफ ने राष्ट्रीय सीमाओं की रक्षा की दिशा में एक साथ काम किया है। संयुक्तता और सहयोग की वही भावना आज भी कायम है और इसे आगे भी कायम रखा जाएगा।