मिट्टी से जुड़ा हुआ खेल है कबड्डी। इसमें शारीरिक बल और चतुराई के जरिए दूसरी टीम के खिलाड़ियों को चित किया जाता है। ट्राइसिटी में ऐसे कई खिलाड़ी है जिन्होंने देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी काबलियत को प्रदर्शित किया है। अगर आप युवा है तो कबड्डी को अपने करियर की तरह चुन सकते हैं।
सिटी ब्यूटीफुल के आसपास में कबड्डी के कई कोचिंग सेंटर है। इनमें सेक्टर-42 स्थित कबड्डी सेंटर अहम है। इसके साथ ही कई स्कूलों में भी प्रशिक्षण सुविधा उपलब्ध है। जहां पर रोजाना कई युवा, रोजाना घंटों अभ्यास में जुटे दिखाई देते है। इनमें से कुछ सीखने के लिए, कुछ टूर्नामेंट की तैयारियों के लिए तो कुछ अपने आप को फिट रखने के लिए कबड्डी खेलते हैं।
खेलने के नियम
कबड्डी में 45 मिनट का एक मैच होता है। इसमें 20-20 मिनट के दो हॉफ होते है और 5 मिनट का रेस्ट होता है। मैच में अधिक अंक बटोरने वाली टीम को विजेता घोषित किया जाता है। दोनों टीम में 7-7 खिलाड़ी होते हैं।
दो तरीके से खेलते है कबड्डी
देश में दो तरह की कबड्डी खेली जाती है। सर्किल और नेशनल स्टाइल कबड्डी। सर्किल कबड्डी में एक खिलाड़ी जिसको छूता है उसी से मुकाबला करते हुए अंक बटोरता है। वहीं नेशनल कबड्डी में एक खिलाड़ी को पकड़ने के लिए 7 खिलाड़ी होते है।
यहां खेला जाता है कबड्डी का खेल
सिटी में सेक्टर-42 स्थित स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में बेहतरीन कबड्डी सेंटर बना हुुआ है। इसके अलावा शहर के कई स्कूलों जीएमएसएसएस धनास, जीएमएसएसएस मलौया, जीएमएचएस-54, जीएमएचएस-37, जीएमएचएस-40 और जीएमएचएस-41 में इसे खेला जाता हैं।
फीस देकर खेल सकते है :
सेक्टर-42 स्थित स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में बेहतरीन कबड्डी सेंटर में पूरे साल के लिए नॉन स्टूडेंट के 600 रुपये और स्टूडेंट के लिए 200 रुपये फीस है। वहीं स्कूलों में इसे निशुल्क ही खेला जाता है।
एक बेहतरीन खिलाड़ी बनने के लिए खिलाड़ी के शरीर गठीला होना चाहिए। इसके साथ ही मानसिक रूप से मजबूत होना भी चाहिए।
- दविंदर सिंह कोहली, कबड्डी कोच।
कबड्डी खेलने से आत्मविश्वास आया। पहले इसे लड़कों का खेल समझा जाता था, लेकिन अब लड़कियां इसमें बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रही हैं। - चंचल, इंटर स्कूल गोल्ड मेडलिस्ट।
जब से कबड्डी की लीग आई है। खिलाड़ियों को आर्थिक स्थिति बेहतर हुई हैं। अब परिवार वाले इस खेल में अपने बच्चों को डाल रहे है।
- सचिन, स्टेट गोल्ड मेडलिस्ट।