बांगर की धरती पर लड़ी गई सियासी जंग जितनी दिलचस्प रही उतना ही उसका परिणाम भी रहा है। पहले तीन राउंड तक जजपा प्रत्याशी दिग्विजय चौटाला आगे चल रहे थे। तीन राउंड तक ग्रामीण क्षेत्रों का मत गिना गया था। जैसे ही शहरी क्षेत्र की गिनती शुरू हुई भाजपा चौथे राउंड से पांच हजार वोटों से आगे हो गई।
पांचवें और छठे राउंड में भी भाजपा आगे रही, लेकिन सातवें और आठवें राउंड में जजपा फिर आगे हो गई, परंतु नौवें, दसवें और 11वें राउंड में भाजपा प्रत्याशी कृष्ण मिड्ढा ने फिर बढ़त बना ली। जबकि 12वें और 13वें राउंड में जेजेपी फिर आगे रही।
इस तरह कुल 13 राउंड की गिनती में 7 राउंड में जजपा और 6 राउंड में भाजपा आगे रही। शहरी क्षेत्रों में जहां भाजपा को बढ़त मिली, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में जजपा आगे रही। बता दें कि जींद उपचुनाव के लिए सभी दलों ने अपनी तरफ से मजबूत प्रत्याशी मैदान में उतारा था। भाजपा ने जींद से विधायक रहे डॉ. हरिचंद मिड्ढा के बेटे डॉ. कृष्ण मिड्ढा को मैदान में उतारा था।
उपचुनाव डॉ. हरिचंद मिड्ढा के निधन के कारण हुआ। इस सीट पर डॉ. हरिचंद मिड्ढा दो बार विधायक चुने गए थे। वहीं, कांग्रेस ने अपने राष्ट्रीय प्रवक्ता व कैथल से विधायक रणदीप सुरजेवाला को मैदान में उतारा। माना जा रहा था कि वह भाजपा को कड़ी टक्कर देंगे, लेकिन वह तीसरे स्थान पर चले गए। वहीं, इनेलो ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पर्चा भरने वाले उमेद सिंह रेढ़ू को अपना प्रत्याशी घोषित किया।
इनेलो से अलग होकर पार्टी बनाने वाले अभय चौटाला के भाई अजय चौटाला ने अपने छोटे बेटे दिग्विजय चौटाला को मैदान में उतारा। एक तरह से जींद उपचुनाव में ताऊ देवीलाल परिवार सियासत में विरासत की जंग भी लड़ रहा था, जिसमें फिलहाल अजय चौटाला आगे निकलते दिख रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इनेलो फिलहाल पांचवें स्थान पर है, जबकि राजकुमार सैनी की नई पार्टी चौथे स्थान पर चल रही है।