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जींद उपचुनावः भाजपा को 'कृष्ण' पर भरोसा, कांग्रेस विकास के सहारे, इनेलो-जजपा ने नहीं खोले पत्ते

Thu, 10 Jan 2019 09:09 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जींद(हरियाणा)
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कृष्ण मिड्ढा
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जींद उपचुनाव को लेकर प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा और कांग्रेस ने अपने-अपने पत्ते खोल दिए हैं। भाजपा ने पूर्व इनेलो विधायक डॉ. हरिचंद मिड्ढा के बेटे कृष्ण मिड्ढा पर भरोसा जताया है। पिता के निधन के बाद कृष्ण ने इनेलो छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था।

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शुरू से ही वे टिकट की दौड़ में आगे माने जा रहे थे। बीच में सांसद रमेश कौशिक और पूर्व मंत्री मांगे राम गुप्ता का नाम भी आया, लेकिन भाजपा ने जातीय समीकरणों और मिड्ढा परिवार की पैठ को देखते हुए कृष्ण पर ही दांव खेला है।

 अब चुनावी साल में होने जा रहे जींद उपचुनाव में कृष्ण भाजपा के तारणहार बनेंगे। हरिचंद मिड्ढा लगातार दो बार इनेलो से विधायक चले आ रहे थे, उनके निधन के बाद यह सीट खाली हुई है। ऐसे में कृष्ण को जहां राजनीति पिता से विरासत में मिली है, वहीं सहानुभूति भी। भाजपा निगम चुनावों में जीत के बाद अब जाटलैंड जींद का किला भी फतह कर लोकसभा और विधानसभा चुनाव के लिए और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहती है। कांग्रेस में टिकट के लिए लंबी माथापच्ची हुई। 
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बुधवार को दिल्ली में जींद उपचुनाव के लिए पर्यवेक्षक केसी वेणुगोपाल की अध्यक्षता में तीन दौर की बैठकें हुईं। एक बार सुबह और दो बार शाम को वेणुगोपाल के साथ पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा, प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर, सीएलपी नेता किरण चौधरी, राज्यसभा सांसद कुमारी सैलजा, एआईसीसी मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला और पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव की बैठकें हुईं। 

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इनमें लंबी चर्चा के बाद कलायत से निर्दलीय विधायक जयप्रकाश के बेटे विकास सहारण को कांग्रेस ने चुनावी दंगल में उतारने का निर्णय लिया है। अंतिम बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को एक नाम का पैनल अंतिम मुहर के लिए भेजा गया। जिसे उन्होंने मंजूरी दे दी। जेपी को हुड्डा समर्थक माना जाता है, ऐसे में जींद उपचुनाव अब सीधे हुड्डा की प्रतिष्ठा से भी जुड़ गया है। 

विकास को टिकट मिलने के बाद निगाहें तंवर खेमे पर भी रहेंगी कि वे मैदान में जीत के लिए कितनी ताकत झोंकता है। उधर, इनेलो अपना उम्मीदवार बुधवार को भी तय नहीं कर पाई। गुरुवार को नामांकन का अंतिम दिन है और इनेलो ने सुबह दस बजे प्रत्याशी के नाम का एलान करने का फैसला लिया है। जननायक जनता पार्टी भी अपना उम्मीदवार घोषित नहीं कर पाई है। 

इनेलो और जजपा की निगाहें एक-दूसरे के उम्मीदवार पर लगी हुई हैं। चौटाला परिवार में टूट के बाद इनेलो को बड़ा झटका लगा है। अब देखना यह है कि जींद के दंगल में चुनावी रण अजय बनाम अभय के परिवार में होता है, या फिर अन्य चेहरों पर दांव लगाया जाता है। गुरुवार को अंतिम दिन होने के कारण नामांकन की भी मारामारी रहेगी। चूंकि, चारों दलों के प्रत्याशियों को तीन बजे से पहले पर्चा दाखिल करना होगा। 
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