फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

देखिए ये है 100 पौंड की कार, जिसे संभालना मुश्किल, पर हजारों चाहने वाले

Tue, 10 Oct 2017 09:14 AM IST
संजीव पंगोत्रा/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
100 पौंड की कार, जिसे संभालना मुश्किल
विज्ञापन
देखिए एक ऐसी कार, जो 100 पौंड की है। इसे संभालना मुश्किल हैं, लेकिन इसके चाहने वाले हजारों हैं और देखने में इतनी मस्त, जवाब नहीं कोई। विंटेज गाड़ियां जब सड़कों पर निकलती हैं तो लोगों की नजर उन पर टिक जाती है। तब गाड़ियों को रखने वाले अपने आप को गर्वित महसूस करते हैं। चंडीगढ़ और आसपास के एरिया में कई ऐसे लोग हैं, जो विंटेज गाड़ियों को बहुत नजाकत से संभालकर रखते हैं।
विज्ञापन


उन्हीं में से एक हैं बिग्रेडियर जतिंदर सिंह फूलका, जो विंटेज गाड़ियों के शौकीन हैं। फूलका के पास 1932 मॉडल की फोर्ड टूयअर और 1952 मॉडल की हिंदुस्तारन-14 विंटेज गाड़ियां, जो विदेशी हैं। इन गाड़ियों को लेकर फूलका और उनका परिवार इतना क्रेजी है कि वह इनकी बच्चों की तरह देख रेख करते हैं। अब तो गाड़ियों की देखभाल करना उनकी दिनचर्या में शामिल हो गया है।

बिग्रेडियर जतिंदर सिंह फूलका ने बताया कि यह गाड़ियां गैराज में जरूर रहती हैं, लेकिन रोजाना इनकी सफाई होती है। हर सप्ताह इन्हें रोड पर निकाला जाता है। कई किलोमीटर तक चलाकर इन्हें चेक किया जाता है। इन गाड़ियों को संजोकर रखना किसी चैलेंज से कम नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि आप ने इसे कितने रुपये में खरीदा था तो उन्होंने कहा यह तो शौक की बात है और शौक की कोई कीमत नहीं होती है।
विज्ञापन


बातों-बातों में उन्होंने इतना जरूर बताया कि 1932 मॉडल की फोर्ड टूयअर जब इंग्लैड से मंगवाई तब उसकी कीमत 100 पौंड थी। यह गाड़ी पहले नवाब ऑफ बरेली के पास रही। इसके बाद ब्रिटिश फौज के अफसर स्कॉट के पास। फिर हिमाचल के महाराजा के पास से मैंने खरीद ली थी। फूलका ने कहा कि वे जब भी इस गाड़ी को लेकर निकलते हैं तो हर कोई देखता रह जाता है। लोग इसको लेकर कई बार उत्सुकता से भरे सवाल पूछते है और अब तो सेल्फी लेते हैं।

विदेशों और कबाड़ियों से स्पेयर पार्ट
बिग्रेडियर जतिंदर सिंह फूलका ने कहा कि इन गाड़ियों की मेनिटेंस करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। एक तो विंटेज, दूसरे अब यह मिलनी बंद हो गई है। खराब होने पर इनके पार्ट्स को हासिल करना सबसे बड़ी समस्या है। पार्ट्स के लिए पुराने कबाड़ियों से संपर्क करना पड़ता है। जब इनके पास भी न मिलते हैं तो मेरे मित्र विदेश जाते हैं तो उनके हाथों मंगवा लेते हैं।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें