अकाली दल और एसजीपीसी के पूर्व प्रधान जत्थेदार जगदेव सिंह तलवंडी की आत्मिक शांति के लिए रविवार को पाठ और अरदास की गई। इसके बाद रायकोट के ऐतिहासिक गुरुद्वारा टाहलीआणा साहिब में श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल सहित कई मंत्री पहुंचे। इस दौरान सरकार की तरफ से मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने जत्थेदार जगदेव सिंह तलवंडी की पत्नी बीबी महिंदर कौर को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बाल ने कहा कि आज अगर वह मुख्यमंत्री है और उनका बेटा सुखबीर सिंह बादल उप मुख्यमंत्री है तो उन्हें यहां तक पहुंचाने में जत्थेदार जगदेव सिंह तलवंडी का अहम योगदान है। सीएम ने कहा कि तलवंडी एक इंसान नहीं बल्कि एक संस्था थे। वह इकलौते इंसान थे जिन्होंने सिख धर्म एंव सिख राजनीति की एक साथ सेवा की। एसजीपीसी के साथ साथ अकाली दल के भी प्रधान रहे। तलवंडी परिवार की तीन पुश्तों ने अकाली दल और सिख पंथ के लिए काम किए और हर मोर्चे पर फतेह हासिल की।
उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि जत्थेदार जगदेव सिंह तलवंडी सिख धर्म और सिख राजनीति की यूनिवर्सिटी थे। उन्होंने अपने पिता के साथ साथ जत्थेदार तलवंडी से भी ज्ञान प्राप्त किया। सुखबीर ने कहा कि वह ऐसे नेताओं और अकाली दल के कुर्बानियों भरे इतिहास पर एक फिल्म बनाएंगे। ताकि आज के अकाली दल के युवा नेताओं को इसकी जानकारी हासिल हो सके।
सीनियर कांग्रेसी नेता जगमीत सिंह बराड़ ने कहा कि जत्थेदार जगदेव सिंह तलवंडी एक मात्र ऐसे नेता थे जिन्होंने पंथ और अकाली दल के लिए अपनी सारी जमीन जायदाद तक से हाथ धो लिया था। उन्हें पंथ रत्न के खिताब से नवाजा जाना चाहिए। इस दौरान अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह, तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी मल सिंह, संत समाज के मुख्य निहाल सिंह हरियां बेला, सुखदेव सिंह ढींढसा, रंजीत सिंह ब्रहमपुरा, एसजीपीसी प्रधान अवतार सिंह मक्कड़, दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व प्रधान अवतार सिंह हित और भाजपा के मास्टर मोहन लाल भी मौजूद रहे।
बुजुर्ग नेता जत्थेदार तलवंडी के बड़े बेटे जत्थेदार रंजीत सिंह तलवंडी को विभिन्न सिख जत्थेबंदियों और धार्मिक संस्थाओं द्वारा दस्तार भेंट की गई। हजारों की संख्या में पहुंचे जत्थेदार जगदेव सिंह तलवंडी परिवार के शुभचिंतकों की हाजिरी में हुए इस श्रद्धांजलि समागम के दौरान राजनीतिक, खेल, धार्मिक और समाजसेवी संस्थाओं के सदस्य मौजूद थे।