जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के घर में आगजनी की घटना को अंजाम देने के आरोपियों पर सरकार पूरी सख्ती बरतने के मूड में है। इन्हीं आरोपियों में से एक विकास उर्फ विस्पी को रोहतक की जिला अदालत से मिली जमानत के खिलाफ हरियाणा सरकार ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उसकी जमानत रद्द करने की मांग की है। जस्टिस एबी चौधरी ने हरियाणा सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए विकास को नोटिस जारी कर आगामी चार अक्तूबर तक जवाब मांगा है।
हरियाणा सरकार की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि जिला अदालत ने यह तय किए बिना कि विकास ने जघन्य अपराध किया है, उसे जमानत दे दी। याचिका में कहा गया कि पुलिस के पास विकास के खिलाफ प्रर्याप्त सबूत थे, जिनसे साबित होता है कि गांव बाहु अकबरपुर का रहने वाला विकास घटनास्थल पर ही मौजूद था और आरोपियों के पास पेट्रोल बम तथा अन्य घातक हथियार भी थे। यह भी सामने आया है कि जब आरोपी घटनास्थल पर मौजूद था, उस समय रोहतक में कर्फ्यू लगा हुआ था। अपने पहले बयान में आरोपी ने पुलिस को बताया था कि वह कैप्टन अभिमन्यु के घर पर दोपहर तीन बजे मौजूद था जब अन्य आरोपियों ने घर को आग लगाई।
याचिका में कहा गया कि इस घटना में न सिर्फ कैप्टन अभिमन्यु के घर को ही आग लगाई गई थी, बल्कि घर के भीतर रखे सात वाहन भी जलाते हुए घर में लूटपाट की गई। इसके बाद आरोपियों ने मकान नंबर 53-57 से सटे एक अन्य घर पर भी धावा बोला और वहां लूटपाट व आगजनी करते हुए 11 और वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया। याचिका में कहा गया है कि अगर ऐसे अपराधी को जमानत दे दी गई तो वह सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है, लिहाजा उसकी जमानत रद्द की जाए।