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जाट आरक्षण: संगठनों और खाप ने सरकार के सामने रखे दो सुझाव

Tue, 15 Mar 2016 09:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरियाणा जाट आरक्षण - फोटो : अमर उजाला
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जाट आरक्षण विधेयक को अंतिम रूप देने से पहले जाट और खाप पंचायतों की मुख्य सचिव के साथ बैठक हुई, जिसमें दो सुझाव पेश किए गए। लगभग ढाई घंटे तक चली बैठक में प्रतिनिधियों ने एसबीसी कोटे के तहत आरक्षण लेने से इनकार कर दिया, लेकिन उन्होंने दो विकल्प पेश किए हैं।
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इसमें मुख्य रूप से पहले में 14 फीसदी आरक्षण देने की मांग की गई है, जबकि दूसरे फॉर्मूले में 21 फीसदी तक के आरक्षण का प्रावधान करने का सुझाव है। इस बैठक के बाद प्रतिनिधियों ने दोनों सुझावों को संवैधानिक बताते हुए इन पर संगठनों की सहमति की बात कही। इसके बावजूद अगर सरकार की ओर से किसी तरह की कमी रह जाती है तो संगठनों ने शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराने की भी बात कही है।

जाट आरक्षण संघर्ष समिति के विजय दीप पंधाल ने कहा कि बैठक में सभी प्रतिनिधियों की आम सहमति के बाद मुख्य सचिव के सामने दो सुझाव रखे गए हैं। एक में 14 फीसदी आरक्षण देने का प्रावधान करने की बात कही गई है और दूसरे में खाप और जाट संगठनों के प्रतिनिधियों ने 21 फीसदी आरक्षण का प्रावधान करने का सुझाव दिया है।
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फॉर्मूला एक
बीसी (बी) के तहत छह जातियों को मिलने वाले 11 फीसदी आरक्षण को बढ़ाकर 14 प्रतिशत किया जाए। इन जातियों की आबादी प्रदेश की कुल आबादी का करीब सात फीसदी है। कैटेगरी बीसी (ए) को 16 फीसदी आरक्षण का लाभ मिल रहा है, लेकिन बीसी (बी) के मौजूदा 11 फीसदी आरक्षण में तीन फीसदी का इजाफा करने से किसान जातियों को 14 फीसदी आरक्षण का लाभ मिल सकेगा। इनकी जनसंख्या प्रदेश की कुल आबादी की करीब 35 फीसदी होगी।

फॉर्मूला दो :
बीसी-बी को मिलने वाले मौजूदा 11 फीसदी आरक्षण में 10 फीसदी की बढ़ोतरी कर 21 फीसदी करने का सुझाव दिया गया है। इससे बीसी (बी) के तहत 6.5 फीसदी आबादी के अलावा जाट समुदाय के करीब 35 फीसदी लोगों को भी 21 फीसदी आरक्षण का लाभ मिल सकेगा।

सरकार के सामने दो सुझाव रखे गए हैं। इनमें सहमति बनने के बाद विधेयक पास किए जाने की उम्मीद है। अगर, इस बार आरक्षण देने में किसी तरह की अनदेखी हुई तो प्रतिनिधि शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराएंगे।
-टेकराम कंडेला, राष्ट्रीय संयोजक, सर्वजातीय खाप पंचायत

सरकार की ओर से एसबीसी के प्रस्ताव पर सहमति नहीं बनी और इसे खारिज कर दिया गया है। संगठनों की मांग है कि 21 फीसदी का प्रस्ताव लागू किया जाए, ताकि आबादी के मुताबिक जाट समुदाय को आरक्षण का लाभ मिल सके।
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-राजिंदर कुंडू, प्रधान कुंडू जाट महासभा

खाप पंचायतों की भी मांग है कि इन सुझावों पर गौर कर सरकार विधेयक लाए, जिसमें समुदाय को उनका हक मिल सके।
-संतोष दहिया, प्रधान सर्वजातीय महिला खाप पंचायत
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