जाट आरक्षण की चिंगारी को सरकार ने जल्द शांत नहीं किया तो इसके दूरगामी असर हरियाणा में होने वाले निवेश पर होंगे। करीब 21 दिन बाद मार्च महीने में होने जा रहे हैपनिंग हरियाणा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट पर आंदोलन का असर पड़ सकता है। प्रदेश की छवि अशांत दिखने पर देश-विदेश के निवेशक अपना हाथ वापस खींच सकते हैं।
करीब सवा साल पहले सत्ता संभालने वाली भाजपा सरकार की ओर से 7-8 मार्च को गुडगांव में ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट सबसे बड़ा आयोजन है। इस समिट की सफलता प्रदेश सरकार के भविष्य को भी तय करेगी।
सरकार बड़े स्तर पर विदेशी निवेश के जरिए हरियाणा को औद्योगिक क्षेत्र में आगे बढ़ाने में सफल हुई तो भाजपा को दूसरी टर्म मिलने की उम्मीद रहेगी। विदेशी निवेश के जरिए चीन, शंघाई, जापान, अमेरिका, कनाडा सहित कई अन्य देशों से एक लाख करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद की जा रही है। इससे प्रदेश के करीब चार लाख से अधिक युवाओं को नौकरी मिलेंगी। इस समय हरियाणा के युवाओं के लिए रोजगार ही सबसे बड़ी मांग है।
ऐसे में आंदोलन अगले कुछ दिन तक जारी रहा तो उद्यमी यहां निवेश करने से हिचकिचाएंगे। इससे पहले वर्ष 2012 में मारूति प्रकरण को लेकर हरियाणा की छवि को नुकसान पहुंचा था।
हिंसक आंदोलन के बाद करीब छह महीने तक मारुति कंपनी बंद रही थी। जापान सहित कई अन्य देशों से हरियाणा में निवेश व विस्तार के कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया था। करीब दो साल तक निवेश पर अघोषित तौर पर ब्रेक रहा। मारुति प्रकरण के दाग को धोने में करीब तीन साल से ज्यादा का समय लगा।
हरियाणा से हर साल करीब 60 हजार करोड़ का निर्यात
-प्रदेश में ऑटो मोबाइल का सबसे अधिक कारोबार
-गारमेंट, लाइट इंजीनियरिंग, रबड़, स्टील, फार्मास्युटिकल, एग्रोफूड निर्यात
-प्रदेश में मारुति, टू व्हीलर में होंडा, हीरो मोटो कार्प, सुजुकी, एस्कार्ट ट्रैक्टर प्रोडेक्शन प्लांट
- गुड़गांव, फरीदाबाद, पानीपत, हिसार उद्योग नगरी के तौर पर विकसित
-साइबर सिटी गुड़गांव आईटी, बीपीओ, काल सेंटर हब