हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन की आड़ में हुई हिंसा की जांच के लिए गठित झा आयोग की समय सीमा बढ़ाने का मामला अब विधि विभाग के पास पहुंच गया है। गृह विभाग ने इस संदर्भ में एडवोकेट जनरल से कानूनी राय मांगी है। आयोग की तरफ से एक बार फिर से समय सीमा बढ़ाए जाने की पेशकश के बाद यह फैसला लिया गया है। अब इस पर अंतिम फैसला सरकार को लेना है।
मालूम हो कि अभी तक छह बार से ज्यादा आयोग की समय सीमा बढ़ाई जा चुकी है। मामला जब गृह विभाग के पास पहुंचा तो गृह मंत्री अनिल विज ने आयोग के कार्यकाल को बढ़ाए जाने में अड़ंगा लगा दिया। उन्होंने पूछा कि यह कार्यकाल क्यों बढ़ाया जाए। लंबी कसरत के बाद अब यह मामला एडवोकेट जनरल के पास पहुंचा है। यह आयोग दंगों के दौरान अधिकारियों की भूमिका की जांच के लिए गठित हुई प्रकाश सिंह कमेटी के अतिरिक्त है।
फरवरी 2016 में हरियाणा में आरक्षण की मांग को लेकर जाट समुदाय ने आंदोलन शुरू किया था लेकिन, अचानक इस आंदोलन ने नेतृत्वहीन होकर हिंसा की शक्ल ले ली। इसकी वजह से चार दिन तक प्रदेश के 8 जिलों में तोड़फोड़ और लूटपाट हुई थी, जिसके कारण काफी संपत्ति का भी नुकसान हुआ था। इस मामले में तकरीबन 30 लोगों की मौत हो गई थी। इस पूरे मामले में आंदोलन के दौरान राज्य सरकार के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल के लिए यूपी के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की अगुवाई में एक कमेटी बनाई थी।
अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगे थे, कई अफसरों पर गाज गिरी
साथ ही कमेटी ने व्यापक पैमाने पर अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे, जिसके बाद सरकार की ओर से कई अफसरों पर गाज भी गिरी। कुछ समय बाद सरकार का प्रकाश सिंह के साथ भी विवाद खड़ा हो गया। इस पर विपक्ष की ओर से कई सवाल खड़े किए गए। बाद में चौतरफा घिर चुकी बीजेपी सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए झा आयोग बना दिया।
इस आयोग को रोहतक, झज्जर, सोनीपत, जींद, हिसार, कैथल और भिवानी में दंगों से हुए जानमाल के नुकसान का पूरा आंकलन करने, तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाओं और तथ्यों को सार्वजनिक करने के अलावा सबसे अहम सामाजिक ताने-बाने को खराब करने के लिए रचे गए कथित षड्यंत्र को बेनकाब करते हुए सरकार को रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया था।
आयोग को इस मामले में लिप्त सभी नेताओं, अधिकारियों समेत आम लोगों से पूछताछ करने की छूट भी दी गई। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी प्रोफेसर वीरेंद्र सिंह से आयोग पूछताछ भी कर चुका है। प्रोफेसर वीरेंद्र ने आयोग को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
मेरे पास फाइल आई थी। जिसके बाद मैने इस मामले में एजी से कानूनी राय मांगी है। अब एजी की राय आने के बाद ही इस पर कोई निर्णय होगा।
- अनिल विज, गृह मंत्री, हरियाणा