जाट आरक्षण आंदोलन को लेकर पिछले 12 दिन से चले रहे आंदोलन को समाप्त करवाने के लिए जाट नेताओें से बातचीत कर सुलह का रास्ता तलाश रही सरकार का राह और मुश्किल हो गई है। जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक को बातचीत के लिए नहीं बुलाए जाने से खफा धरनों पर बैठे जाटों ने शुक्रवार को पंचकूला के सेक्टर 14 स्थित किसान भवन में होने वाली बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया है।
जाटों का कहना है कि सरकार दोहरी नीति अपना रही है। खापों को बातचीत के लिए बुलाया है, लेकिन मलिका को नहीं। ऐसे वे इस वार्ता शामिल नहीं होंगे। उधर कई खापों ने भी सरकार की ओर से की जा रही बातचीत की पेशकश से खुद को अलग कर लिया है। वीरवार को कई जिलों में बातचीत का न्योता लेकर प्रशासनिक अधिकारी धरनास्थलों पर पहुंचे, लेकिन जाटों ने इसका फैसला समिति के मुखिया मलिक पर छोड़ दिया।
बता दें कि प्रदेश के 12 जिलों में अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति (मलिक गुट) के नेतृत्व में अनिश्चितकालीन धरने चल रहे हैं। धरने खत्म करवाने के लिए सरकार की तरफ से पहले 15 और बाद में 17 जून को खापों और जाट समितियों के पदाधिकारियों को चंडीगढ़ में वार्ता के लिए बुलाया गया था।
इस निमंत्रण को लेकर समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक का कहना है कि खाप या अन्य समितियों के नेताओं के साथ बैठकर हम वार्ता नहीं करेंगे। इसलिए इस वार्ता में समिति की तरफ से कोई प्रतिनिधि भाग नहीं लेगा।
मामला कोर्ट में है तो धरने किस बात के: कैप्टन
जाट आरक्षण के लिए आंदोलन
- फोटो : amar ujala
रोहतक-84 खाप प्रधान हरदीप अहलावत का कहना है कि सरकार के साथ वार्ता करने का कोई फायदा नहीं है। कई बार वार्ता हो चुकी है, लेकिन समाधान नहीं हुआ। सरकार खाप प्रतिनिधियों और समाज को आमने-सामने खड़ा कर रही है। हम समाज के साथ हैं और इसलिए इस वार्ता में रोहतक, सोनीपत और झज्जर जिले का कोई भी खाप प्रतिनिधि भाग नहीं लेगा।
यशपाल मलिक, राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने बताया कि धरने जाट आरक्षण संघर्ष समिति के आह्वान पर चल रहे हैं, जबकि सरकार खाप प्रतिनिधियों व अन्य समितियों के पदाधिकारियों के साथ वार्ता कर रही है। इससे धरने समाप्त नहीं होंगे। खाप या अन्य समितियों के नेताओं के साथ बैठकर हम वार्ता नहीं करेंगे। इसलिए इस वार्ता में समिति की तरफ से कोई प्रतिनिधि भाग नहीं लेगा।
हवा सिंह सांगवान प्रदेशाध्यक्ष, अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने बताया कि वार्ता के लिए सरकार की तरफ से निमंत्रण मिला है। शुक्रवार को हाईकोर्ट में सुनवाई भी होनी है। इसके लिए मैं चंडीगढ़ जाऊंगा। अगर समय मिला तो सरकार के साथ भी वार्ता करेंगे।
वहीं उध्ार वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने जाटों के धरनों को जायज नहीं ठहराया है। उनका कहना है कि जाट आरक्षण पर हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगाई है और शुक्रवार को सुनवाई होनी है। ऐसे में जाट नेताओं को कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए। सरकार ने आरक्षण दे दिया है, मामला जब कोर्ट में हैं तो धरने किस बात के। सभी को यायालय पर भरोसा रखना चाहिए। उन्होंने कहा आरक्षण को लेकर सीएम मनोहर लाल खट्टर से ज्यादा साफ नीयत किसी की नहीं है।