काला दिवस मनाने के बाद धरने पर बैठे जाट और भी आक्रामक हो गए हैं। नई रणनीति का ऐलान किया गया है, जिसके चलते सरकार और लोगों की मुश्किलें बढ़ेंगी। जसिया में बलिदान दिवस के बाद रविवार को काला दिवस पर भी काफी संख्या में जाट समाज के लोग जुटे।
इस दौरान अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने दो मार्च को दिल्ली प्रदर्शन का आह्वान किया। दोपहर करीब दो बजे समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक धरनास्थल पर पहुंचे। मलिक ने मंच से कहा कि जो दुकानदार जाट आरक्षण का समर्थन नहीं करेगा उसका बहिष्कार किया जाए।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकतर व्यापारी उनके समर्थन में हैं। उन्होंने उन्होंने आह्वान किया कि अगले एक माह तक दुकानदारों से कम सामान खरीदा जाए। केवल उसी दुकान से सामान खरीदा जाए, जिसकी दुकान पर जाट आरक्षण के समर्थन का पर्चा लगा हो। जो दुकानदार समर्थन नहीं करता उसका बहिष्कार किया जाए।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान
जाटों ने मनाया 'काला दिवस'
- फोटो : अमर उजाला
मलिक ने कहा कि एक मार्च से असहयोग आंदोलन और दो मार्च से दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अब रोहतक, सोनीपत व झज्जर में धरनों की संख्या नहीं बढ़ाई जाएगी।
2 मार्च को सिर्फ 50 हजार लोग पुरुष व युवा संसद के लिए कूच करेंगे। धरने महिलाएं चलाएंगी। 2 मार्च के प्रदर्शन में संसद के घेराव की रणनीति का खुलासा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार को लग रहा था कि धरनों पर भीड़ कम हो गई है, लेकिन भीड़ कम नहीं हुई। भीड़ को रणनीति के तहत कम किया गया था।
वहीं, समिति के प्रदेश प्रभारी अशोक बल्हारा ने आह्वान किया कि काला दिवस की तरह जाटों की होली भी सूखी और काली मनाई जाएगी। कोई भी होली नहीं खेलेगा। उन्होंने कहा कि अब समिति असहयोग आंदोलन में बिजली, पानी व सरकारी कर्ज और अन्य भुगतान न करने के साथ एक दिन के लिए सभी समाज के लोग दूध व अपनी सब्जी की सप्लाई नहीं किया जाएगा। अगर सरकार मांगें पूरी करने को नहीं मानी तो असहयोग बढ़ाया भी जा सकता है।
इस तरह से मनाया गया काला दिवस
Jat reservation protest's black day
बता दें कि काला दिवस पर जाट समाज ने एक बार फिर बड़ी संख्या में इकट्ठा होकर सरकार की नींद उड़ा दी। जसिया में जाट समाज का धरना 29वें दिन भी शांतिपूर्ण रहा। हालांकि, काला दिवस मनाने की वजह से काफी संख्या में लोग धरने पर पहुंचे थे।
इसी के मद्देनजर सुरक्षा बल भी तैनात किये गए गए थे। सुबह से ही महिलाओं और पुरुषों के साथ बच्चे धरनास्थल पर पहुंचने लगे थे। महिलाएं काली चुन्नी और काले कपड़े पहनकर पहुंचीं तो पुरुषों ने काली पगड़ी या हाथ में काली पट्टी बांधकर विरोध जताया।
इस मौके पर युवाओं ने कई तरीके अपनाए। इसके तहत युवा कोई कुर्ता डालकर पहुंचा तो किसी ने अपने शरीर पर ही काला रंग लगा लिया, वहीं कुछ युवकों ने कार को ही काला कर दिया, ताकि विरोध जताया जा सके। इसी तरह से युवाओं ने अपने वाट्सएप प्रोफाइल को भी काला दिवस लिखकर या पूरी तरह से काली कर दी।