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Haryana Assembly Election: बिखर चुकी है जजपा... अब विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा-कांग्रेस के बागियों पर निगाह

Tue, 20 Aug 2024 02:58 PM IST
निवेदिता वर्मा कुलदीप शुक्ला, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

2019 में इनेलो से अलग होकर जजपा बनी थी। पहले विधानसभा चुनाव में 14.80 फीसदी वोट हासिल कर जजपा ने 10 सीटों पर जीत दर्ज की थी। साढ़े चार वर्ष तक भाजपा-जजपा की गठबंधन सरकार चली। गठबंधन टूटने के बाद लोकसभा चुनाव में पार्टी ने किस्मत आजमाई, लेकिन सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। पार्टी को मात्र 0.87 फीसदी वोट मिले।
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dushyant chautala - फोटो : twitter
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विस्तार
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2019 में हरियाणा में दस सीटें जीतकर चाबी के साथ सत्ता का ताला खोलने वाली जजपा अब पूरी तरह से बिखर चुकी है। संगठन पहले ही खत्म हो चुका है और अब विधायक भी पार्टी का साथ छोड़ रहे हैं। 

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सात विधायक पार्टी से नाता तोड़ चुके हैं। अब दुष्यंत चौटाला, उनकी मां नैना चौटाला और जुलाना के विधायक अमरजीत ढांडा ही पार्टी में बचे हैं। ऐसे में इस बार विधानसभा चुनाव में जजपा के लिए सभी 90 सीटों पर उम्मीदवार तलाशना बड़ी चुनौती है। 

बिगड़ी स्थिति को देखते हुए जजपा ने 2019 की चुनावी रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। जजपा ने भाजपा और कांग्रेस के बागियों पर निगाह टिका दी है। इन दोनों दलों में जिन नेताओं को टिकट नहीं मिलेगी, जजपा उन पर दांव लगा सकती है।
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सत्ता में हटने के बाद से जजपा लगातार टूट रही है। अब पार्टी के पास न तो संगठन बचा है और न ही विधायक। इसलिए पार्टी उन सीटों पर फोकस कर रही है, जहां 2019 के चुनाव में पार्टी दूसरे या तीसरे नंबर पर रही थी। पुराने कार्यकर्ताओं को जोड़ने के लिए डॉ. अजय सिंह चौटाला और दुष्यंत चौटाला लगातार बैठकें कर रहे हैं। बावजूद इसके सभी सीटों पर प्रत्याशी तलाशना पार्टी के लिए आसान नहीं है। जजपा को केवल भाजपा-कांग्रेस के बागियों से आस है।

जजपा के टिकट पर 2019 में जीते बागी

विधायक                कहां से आए थे
अनूप धानक                  इनेलो
ईश्वर सिंह                   कांग्रेस
रामकरण काला              कांग्रेस
देवेंद्र बबली                 कांग्रेस
जोगी राम सिहाग            भाजपा
रामकुमार गौतम             भाजपा
रामनिवास सुरजाखेड़ा      भाजपा

भाजपा-कांग्रेस में घमासान तय

भाजपा में एक-एक सीट के लिए औसतन पांच से सात नेताओं ने आवेदन किया है। इसी तरह कांग्रेस की एक-एक सीट के लिए औसतन 28 नेताओं ने आवेदन किया है। इन दोनों पार्टियों में टिकट को लेकर घमासान तय माना जा रहा है। इन पार्टियों से निकलने वाले नेता दूसरे विकल्प की तलाश करेंगे। हालांकि, ये भी देखना होगा कि जजपा कितने बागियों को साध पाती है, क्योंकि पिछली बार के मुकाबले इस बार माहौल बदला हुआ है।

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दुष्यंत चौटाला से सीधी बात

जजपा की आगामी चुनावी रणनीति क्या रहेगी?
पार्टी के विकास कार्यों की जानकारी हलका स्तर पर घर-घर पहुंचाई जा रही है। पार्टी अनुभवी, शिक्षित और मेहनती उम्मीदवारों को ही चुनाव मैदान में उतारेगी।

पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी?
हम सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे, लेकिन फोकस 50-60 सीटों पर रहेगा। पिछले विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर हम दूसरे या तीसरे स्थान पर रहे थे। खरखौदा और फतेहाबाद में जजपा बेहद कम मार्जिन से हारी थी।

इस बार कितनी सीट पर जीत की उम्मीद है?
पांच साल में हमने बूथ स्तर तक महिलाओं और युवाओं की टीम खड़ी की है। हमारा लक्ष्य हरियाणा में पूर्ण बहुमत से सरकार बनाना है। लोकसभा चुनाव में सभी उम्मीदवारों के जमानत जब्त हुई थी। वोट प्रतिशत एक से भी कम रहा, इसकी क्या वजह रही?

इस बार लोकसभा चुनाव पीएम नरेंद्र मोदी को हराने और जिताने का था। सभी राज्यों में मतदाताओं का यही जोर रहा कि भाजपा और कांग्रेस के अलावा किसी तीसरे दल को वोट देकर लड़ाई को कमजोर न किया जाए। किसान, खिलाड़ियों के आंदोलन के चलते जनता में भाजपा के प्रति खासा रोष था और गठबंधन में रहने के कारण इसका खामियाजा हमें भी भुगतना पड़ा। भाजपा के साथ जाने की गलती हम दोबारा नहीं करेंगे।
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