2019 में हरियाणा में दस सीटें जीतकर चाबी के साथ सत्ता का ताला खोलने वाली जजपा अब पूरी तरह से बिखर चुकी है। संगठन पहले ही खत्म हो चुका है और अब विधायक भी पार्टी का साथ छोड़ रहे हैं।
सात विधायक पार्टी से नाता तोड़ चुके हैं। अब दुष्यंत चौटाला, उनकी मां नैना चौटाला और जुलाना के विधायक अमरजीत ढांडा ही पार्टी में बचे हैं। ऐसे में इस बार विधानसभा चुनाव में जजपा के लिए सभी 90 सीटों पर उम्मीदवार तलाशना बड़ी चुनौती है।
बिगड़ी स्थिति को देखते हुए जजपा ने 2019 की चुनावी रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। जजपा ने भाजपा और कांग्रेस के बागियों पर निगाह टिका दी है। इन दोनों दलों में जिन नेताओं को टिकट नहीं मिलेगी, जजपा उन पर दांव लगा सकती है।
सत्ता में हटने के बाद से जजपा लगातार टूट रही है। अब पार्टी के पास न तो संगठन बचा है और न ही विधायक। इसलिए पार्टी उन सीटों पर फोकस कर रही है, जहां 2019 के चुनाव में पार्टी दूसरे या तीसरे नंबर पर रही थी। पुराने कार्यकर्ताओं को जोड़ने के लिए डॉ. अजय सिंह चौटाला और दुष्यंत चौटाला लगातार बैठकें कर रहे हैं। बावजूद इसके सभी सीटों पर प्रत्याशी तलाशना पार्टी के लिए आसान नहीं है। जजपा को केवल भाजपा-कांग्रेस के बागियों से आस है।
जजपा के टिकट पर 2019 में जीते बागी
विधायक कहां से आए थे
अनूप धानक इनेलो
ईश्वर सिंह कांग्रेस
रामकरण काला कांग्रेस
देवेंद्र बबली कांग्रेस
जोगी राम सिहाग भाजपा
रामकुमार गौतम भाजपा
रामनिवास सुरजाखेड़ा भाजपा
भाजपा-कांग्रेस में घमासान तय
भाजपा में एक-एक सीट के लिए औसतन पांच से सात नेताओं ने आवेदन किया है। इसी तरह कांग्रेस की एक-एक सीट के लिए औसतन 28 नेताओं ने आवेदन किया है। इन दोनों पार्टियों में टिकट को लेकर घमासान तय माना जा रहा है। इन पार्टियों से निकलने वाले नेता दूसरे विकल्प की तलाश करेंगे। हालांकि, ये भी देखना होगा कि जजपा कितने बागियों को साध पाती है, क्योंकि पिछली बार के मुकाबले इस बार माहौल बदला हुआ है।