लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद पार्टी ने अपने संगठन का पुनर्गठन करने का काम शुरू किया। पिछले दिनों सभी 22 जिला अध्यक्षों को बदल दिया। इसके साथ ही एक दिन पहले संगठन को मजबूत करते हुए 50 पदाधिकारियों की सूची जारी की। मगर पार्टी के सामने दिक्कत यह है कि उनके पास परिवार के अलावा कोई बड़ा चेहरा बचा नहीं है, जो पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत कर सके। हालांकि चुनाव की घोषणा के बाद दुष्यंत ने कहा कि जजपा विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार है। पार्टी के कार्यकर्ता चुनाव जीतने के लिए दिन-रात एक कर देंगे।
जजपा को सबसे बड़ा नुकसान किसान आंदोलन की वजह से हुआ है। आंदोलन के दौरान जजपा भाजपा के साथ सरकार में शामिल थी। किसान आंदोलन के पक्ष में पार्टी का रुख स्पष्ट नहीं था। इस वजह से उसे भारी आलोचना झेलनी पड़ी। लोकसभा चुनाव में दुष्यंत को जगह-जगह इसका विरोध भी झेलना पड़ा था।