जालंधर की हॉकी दुनिया में छाई, अब बनी रहस्य
मलिक हॉकी के मालिक विपिन परनीजा ने बताया कि युवाओं को इंडस्ट्री में लाने के लिए स्टाइपेंड देकर आरएनडी खोलने के लिए लोन मिलना चाहिए। पहले जालंधर में स्टेट ट्रेडिंग कंपनी (एसटीसी) विदेश से माल मंगवाती थी और जिसे जितना चाहिए होता था, व्यापारी खरीद लेता था लेकिन अब कुछ साल से एटीसी बंद है।
जालंधर के ही कुछ व्यापारियों ने विदेश से खरीदे जा रहे सामान के पैसे बढ़ा दिए तो छोटे व्यापारी खत्म हो गए। वुडन हॉकी का उत्पादन और मांग 90 फीसदी तक खत्म हो गई है। अब कंपोजिट हॉकी की डिमांड है, जो देश में कुछ ही यूनिट बनाते हैं और कच्ची सामग्री विदेश से आती है। एक समय तक हॉकी के जादूगर मेजर ध्यान चंद के हाथों से स्वर्णिम इतिहास लिखने वाली जालंधर की हॉकी स्टिक आज खुद रहस्य बन गई है।
मैरीकॉम भी जेजे योनेक्स के ग्लब्ज पहनती थीं
दुनिया में ऐसा कोई खेल नहीं, जिसमें उच्च गुणवत्ता का सामान उपलब्ध कराने में जालंधर की इंडस्ट्री को याद न किया जाता हो। जालंधर के जेजे योनेक्स स्पोर्ट्स सामान विक्रेता शाम सुंदर ने कहा कि 1968 से हम स्पोर्ट्स इंडस्ट्री में हैं। हमारे योनेक्स के बॉक्सिंग ग्लब्ज कभी गोल्डन गर्ल एमसी मैरीकॉम पहनती थी और आज इंडस्ट्री स्ट्रगल कर रही है। यहां निर्माण में लागत ज्यादा आ रही है और चीन का माल सस्ता है, जिसे लोग खरीद और बेच रहे हैं। सरकार को चाहिए कि चीन से आने वाले खेल के सामान को प्रतिबंधित किया जाए, ताकि हालात सुधर सकें।