संगरूर में अनुसूचित जाति के युवक जगमेल सिंह की हत्या के मामले में सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मुख्य सचिव और डीजीपी को निर्देश दिए कि केस में समयबद्ध जांच और ट्रायल को यकीनी बनाए जाएं ताकि पीड़ित परिवार को जल्द इंसाफ मिल सके। विदेश दौरे पर गए कैप्टन ने मुख्य सचिव करन अवतार सिंह और डीजीपी दिनकर गुप्ता से बात कर सारे मामले और हालात की जानकारी ली।
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सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि सीएम ने दोनों अफसरों को हिदायत दी कि आरोपियों को तीन माह के अंदर सख्त सजा मिलना यकीनी बनाएं। उन्होंने पीड़ित परिवार से रोष प्रदर्शन बंद करने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सरकार उन्हें इंसाफ दिलाने और पुनर्वास के लिए वचनबद्ध है। सीएम ने सभी सियासतदानों से भी कहा कि इस मुद्दे पर राजनीति न करें। यह गंभीर अपराध है और आरोपियों को हर हाल में सजा मिलेगी। किसी भी राजनीतिक दल या नेता को ऐसे दुखद हादसे पर राजनीतिक रोटियां नहीं सेंकनी चाहिए।
उनकी सरकार दलितों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और उन पर कोई अत्याचार नहीं होने दिया जाएगा। आरोपियों के खिलाफ थाना लहरा में आईपीसी की धारा 302 समेत कई धाराओं और एससी-एसटी एक्ट के तहत पर्चा दर्ज किया गया है। चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। गौरतलब है कि आरोपियों ने जगमेल सिंह को बुरी तरह पीटा था और उसका मांस प्लास से नोच लिया था। उसे पीजीआई लाया गया जहां उसके पैर काटने पड़े। शरीर में इंफेक्शन फैलने से उसने दम तोड़ दिया था।
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विभिन्न संगठनों ने जाखल-सुनाम रोड पर लगाया जाम
गांव चंगालीवाला में चौधरियों की क्रूरता का शिकार हुए जगमेल सिंह जग्गा के परिवार को इंसाफ दिलाने के लिए रविवार को विभिन्न संगठनों ने गांव चंगालीवाला के नजदीक जाखल-सुनाम मुख्य मार्ग पर धरना लगाकर दिन भर यातायात बाधित किए रखा। इससे पहले गांव की रामदासिया धर्मशाला में प्रदर्शनकारी एकत्रित हुए और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए रोष मार्च निकाला गया। वहीं रविवार को भी जगमेल का अंतिम संस्कार नहीं किया जा सका। उसकी बॉडी अभी पीजीआई में ही है।
आम आदमी पार्टी के हलका सुनाम के विधायक अमन अरोड़ा और विपक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा ने परिवार के साथ दुख व्यक्त करते हुए परिवार को इंसाफ दिलाने का भरोसा दिलाया। अरोड़ा ने कहा कि अनुसूचित जाति से संबंधित जगमेल सिंह जग्गा पर सात नवंबर को अमानवीय अत्याचार किया गया, जिसकी रिपोर्ट भी पुलिस के पास पहुंची। हैरानी की बात है कि पुलिस ने इस केस में एफआईआर 17 नवंबर को दर्ज की। जबकि पुलिस को एफआईआर उसी दिन दर्ज करनी चाहिए थी।
विधायक अरोड़ा ने मांग की कि गरीब परिवार के जगमेल सिंह जग्गा के साथ दरिंदगी से पेश आने वाले गुंडा तत्वों के खिलाफ पंजाब पुलिस जल्द चालान पेश करे और उनके खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में केस चलाकर उन्हें फांसी पर लटकाया जाए। धरने में शामिल विभिन्न संगठनों के नेताओं ने मांग की कि पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। साथ ही मांग की गई कि जगमेल के साथ क्रूरता करने वाले सभी आरोपियों को सख्त से सख्त सजा दी जाए।
उन्होंने ऐलान किया कि जब तक उनकी मांगों को स्वीकार नहीं किया जाएगा, उनका संघर्ष जारी रहेगा और वह पीड़ित परिवार को इंसाफ दिलाकर ही दम लेंगे। धरने में पहुंचे अकाली नेता गुलजारी मूनक, लक्खा सिधाना, राजिंदर दीपा ने परिवार के साथ दुख व्यक्त करते हुए इस घटना की आलोचना की और आरोपियों को सख्त सजा देने की मांग की।
आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान लहरागागा के गांव चंगालीवाला में अनुसूचित जाति युवक पर किए अमानवीय बर्ताव को लेकर गृहमंत्री अमित शाह से मिलेंगे। यह मामला संसद में भी उठाएंगे। मान ने कहा कि जिस क्रूरता से जगमेल सिंह को नोच-नोच कर मारा गया, यूरिन पिलाया गया, उसकी जितनी निंदा की जाए कम है। ऐसा अमानवीय व्यवहार करने वालों को सख्त सजा मिले। ताकि भविष्य में कोई ऐसा अमानवीय काम करने की सोच भी न सके।
अगर बादल सरकार के दौरान अबोहर में भीम टांक की बादल परिवार के करीबी शिव लाल डोडा द्वारा की घिनौनी हत्या पर सख्त सजा दी जाती तो आज चंगालीवाला में यह नहीं होता। न बादल के समय कानून का राज था, न अब है। मान ने इस मामले की सीबीआई जांच की मांग करते हुए जांच के घेरे में पूर्व सीएम रजिंदर कौर भट्ठल, उनके भतीजे हेनरी और एसएचओ लहरागागा को भी लाने को कहा। मान ने आरोप लगाया कि इसमें राजनीतिक दखल की बू आ रही है।
वारदात सात नवंबर की है, एफआईआर छह दिन बाद दर्ज की गई, जब जगमेल की हालत काफी गंभीर हो गई थी। किसी राजनीतिक दबाव में ही इतने दिन में मामला दर्ज नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार यूरोप में अपनी किचन कैबिनेट के साथ मस्त है, यहां दरिंदे इंसानियत का शिकार कर रहे हैं। मान ने कहा कि चार दिन पहले उन्होंने सीएम के विदेश दौरे के बारे में अंदेशा जाहिर किया था, वह सच हुआ। जगमेल के परिजनों और संगठनों ने इंसाफ की मांग को लेकर लहरागागा इलाका जाम कर दिया है।
लेकिन सीएम की गैर हाजिरी में कोई अधिकारिक नुमाइंदा नहीं है जो उनकी जगह पीड़ित परिवार को भरोसा दे सके। क्योंकि सीएम जाने से पहले सीनियर मोस्ट मंत्री को कार्यभार नहीं सौंप कर गए हैं। मान ने पीड़ित परिवार को एक सरकारी नौकरी और पचास लाख मुआवजा देने की मांग की।