दस तारीख को कई राज्यों में भारी मात्रा में मतदान हुआ। वोट डालने के लिए बड़ी संख्या में लोगों का आना और उनके उत्साह के पीछे क्या संदेश है। आम तौर पर चुनावों में भारत में मतदान प्रतिशत 50 से 60 प्रतिशत होता है।
जिन चुनावों में जनता रुचि नहीं लेती, तब 40 प्रतिशत तक भी मतदान देखा गया है। इस चुनाव में लोग भारी संख्या में मतदान कर रहे हैं। इसके पीछे उनकी क्या मंशा है।
भारी संख्या में मतदान के पीछे एक व्यवस्था काम करती है। भारी संख्या में मतदान तभी होता है जब मतदाता कुछ बताना चाहते हैं। इन चुनावों में मतदाता बदलाव लाना चाहते हैं जो कांग्रेस के लिए एक बुरी खबर है।
यह खबर सामने आई है कि दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और जम्मू में कांग्रेस तीन नंबर पर धकेल दी गई है। यह बात उड़ीसा के काफी क्षेत्रों के लिए भी सच साबित हो सकती है।
उत्तरप्रदेश में प्राप्त खबरों के अनुसार कांग्रेस 4 नंबर पर धकेल दी गई है। ऐसी पार्टियां जो पूर्ण तौर पर एक परिवार पर भरोसा रखती हैं अपना आधार खो बैठती हैं और नुकसान उठाती हैं।
कीमतों में बढ़ोतरी, भ्रष्टाचार और उचित नेतृत्व की कमी ने कांग्रेस से मतदाताओं को दूर धकेल दिया है। भारतीय जनता पार्टी ने सुनिश्चित चुनाव अभियान, एक बढ़िया राजनीतिक एजेंडा और नरेंद्र मोदी को केंद्र बिंदु बना बहुत अच्छा चुनाव अभियान चलाया है।
राहुल गांधी और सोनिया गांधी का कोई असर दिखाई नहीं पड़ता। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तो इस चुनाव में कोई मुद्दा ही नहीं है। बीजेपी भारी मतदान से गदगद है। दि मोर दि मैरियर अर्थात जितना ज्यादा उतना अच्छा।
कैप्टन सुब्रह्मण्यम स्वामी द्वारा लगाए गए आरोपों के बारे में कैप्टन सिर्फ झूठ बोलते हैं और भड़कते हैं जो एक समझदार आदमी नहीं करता।
कल मैंने कैप्टन को सलाह दी थी कि अपने परिवार के खिलाफ लगे आरोपों पर वह क्यों नहीं किसी सरकारी संस्था को उचित जांच कराने के लिए निश्चित करवाते।
सरकारी संस्थान द्वारा इनके परिवार के सदस्यों पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच होने के बाद ही सत्य सामने आएगा।