पंजाब केमिकल लैब खरड़ में पैसे लेकर ड्रग्स सैंपल फेल करने के मामले में दोषी ठहराए गए दस लोगों को जिला अदालत ने सजा सुनाई। उक्त लोग को भ्रष्टाचार एक्ट व आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत साढ़े तीन साल से लेकर सात-सात साल तक की सजा सुनाई गई। साथ ही दोषियों को सात हजार से लेकर दो लाख रुपये तक जुर्माना भी लगाया गया है।
दोषियों में डॉ. राजविंदरपाल सिंह, लैब टेक्नीशियन गुरजंट सिंह, लेखराज, लैबोरेटरी अटेंडेंट जगदीप सिंह, शिंगारा सिंह, कंप्यूटर ऑपरेटर महिला परवीन अरोड़ा, हेड कांस्टेबल हरदेव सिंह, हेड कांस्टेबल राकेश कुमार, हेड कांस्टेबल अश्वनी कुमार, गुरजंट सिंह और लैबोरेटरी अटेंडेंट दर्शन सिंह शामिल है। यह फैसला विजिलेंस की स्पेशल जज मोनिका गोयल की अदालत ने सुनाया। इसके बाद आरोपियों को सीधे जेल भेज दिया गया। जबकि मामले में छह लोग बरी किए जा चुके हैं। वहीं, एक आरोपी की मामले की सुनवाई के दौरान की मौत हो गई थी।
सजा सुनाते वक्त अदालत में एक बेहोश होकर गिरा
शुक्रवार दोपहर जज ने जब सजा सुनानी शुरू की तो दर्शन सिंह बेहोश होकर अदालत में गिर गया। इस दौरान उसके मुंह से खून भी निकल गया, लेकिन जज ने सजा सुनाने का क्रम जारी रखा। दूसरी तरफ अदालत के मुलाजिमों ने उक्त व्यक्ति को संभाला। जज के जाने के बाद अदालत के मुलाजिमों ने उसे पानी पिलाया। साथ ही सभी दोषी उसे दिलासा देने लगे कि तुझे सबसे कम सजा हुई है। इसके बाद वह ठीक हुआ। इसके बाद उसे जेल भेज दिया।
पांच साल चला ट्रायल, साढ़े तीन मिनट में सुनाई सजा
यह मामला करीब पांच साल चला, लेकिन जिला अदालत ने दोषियों को मात्र साढ़े तीन मिनट में सजा सुनाई। सजा सुनाने से पहले जज ने सभी लोगों को बाहर निकाल दिया। कोर्ट में केवल मामले के दोषी, उनके वकील और पुलिस मुलाजिम थे। करीब सवा तीन बजे जज ने सजा सुनाई। इसके बाद दोषियों को जेल भेज दिया गया।
112 गवाह पेश हुए, तीन सौ पेज का था फैसला
इस मामले में अदालत में 112 गवाह पेश हुए। अदालत ने 300 पेज में फैसला सुनाया है, जिसमें कहा है कि यह जुर्म काफी घातक है। इससे न्यायिक प्रक्रिया तक प्रभावित हुई। इस मामले में जितनी सजा सुनाई गई है, वह काफी कम है।
ऐसे सुनाई गई सजा
डॉ. राजविंदरपाल सिंह व सभी आरोपी आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471, 201, 218, 120बी व प्रीवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट 1998 13 (2) के तहत दोषी ठहराए गए हैं। यहां डॉक्टर को सात साल की सजा व दो लाख जुर्माना लगाया गया। जबकि शिंगारा सिंह को चार साल की सजा और एक लाख जुुर्माना, दर्शन सिंह को अन्य धाराओं के अलावा प्रीवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा आठ के तहत साढ़े तीन साल की सजा और सात हजार जुर्माना लगाया गया है। जबकि जगदीप सिंह, हरदेव सिंह, गुरजंट सिंह, प्रवीन अरोड़ा, लेखराज, अश्वनी कुमार और राकेश कुमार को चार साल सजा और दस हजार जुर्माना लगाया है।
यह था मामला
थाना शंभु में 11 जुलाई 2012 को आरोपी विनय कुमार व कारू लाल पर केस दर्ज हुआ था। उनसे दस-दस किलो अफीम व 100 ग्राम हेरोइन मिली। आरोपियों का एक दोस्त वकील था। इसके सैंपल केमिकल एग्जामिनर पंजाब खरड़ में डॉ. राजविंदरपाल सिंह के पास निरीक्षण के लिए आए थे। डॉ. राजविंदर आरोपियों के वकील का अच्छा दोस्त था। वकील ने आरोपी विनय कुमार व कारू लाल को इस बात के लिए सहमत करवाया कि वह उनके अफीम के नमूने फेल करवा सकता है। क्योंकि केमिकल एग्जामिनर उसका अच्छा दोस्त है। आरोपियों के घरवालों ने वकील को छह लाख रुपये दिए थे और इसमें से 2.5 लाख रुपये डॉ. राजविंदरपाल सिंह ने सैंपल फेल की रिपोर्ट तैयार करने के लिए थे। इसके बाद इनके खिलाफ शिकायत मिलने पर दोबारा सैंपल चेक किए गए तो सारा मामला खुला।