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पार्किंग को जगह नहीं, एक से अधिक गाड़ियां रखना बना स्टेटस सिंबल

Sun, 28 Feb 2016 01:09 AM IST
पवन तिवारी/अमर उजाला, चंडीगढ़
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शहर में दिन-प्रतिदिन बढ़ती गाड़ियों की संख्या पुलिस प्रशासन के लिए चिंता का सबब बनी हुई है। पांच वर्षों में एक लाख 85 हजार 772 नए वाहन रजिस्टर्ड (पंजीकृत) हुए हैं। गाड़ियों को खड़ी करने की जगह हो या न हो, लेकिन एक घर में दो से तीन वाहन देखे जा सकते हैं।
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लोगों की बढ़ती आमदनी और बैंकों से सस्ती ब्याज दरों पर मिल रहे लोन के कारण शहर में लगातार कारों की संख्या बढ़ती जा रही है। परिवार में एक से अधिक गाड़ियां रखना स्टेटस सिंबल बन गया है।

ट्रैफिक पुलिस द्वारा मुहैया करवाए गए आंकड़ों के मुताबिक यहां दिसंबर 2015 तक 10 लाख 21 हजार 940 वाहन पंजीकृत हैं। जबकि शहर की जनसंख्या 11 लाख से कुछ अधिक है। 2010 में रजिस्टर्ड वाहनों की संख्या सात लाख 92 हजार 329 थी।
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पिछले पांच साल में दो लाख 29 हजार 611 नए वाहन यहां रजिस्टर्ड हुए। इसके अलावा रोजाना पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड समेत अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों की संख्या अलग है।

साल------------वाहनों की संख्या     
2011----------836168           
2012----------883653            
2013----------929113           
2014----------975657           
2015----------1021940         

एक पते पर एक गाड़ी पर हो विचार
पुलिस प्रशासन के अधिकारियों का मानना है कि अगर एक पते पर एक गाड़ी का ही रजिस्ट्रेशन हो तो वाहनों की संख्या पर कुछ अंकुश जरूर लग सकता है। अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला लेना आसान नहीं है। इस पर विचार किया जा सकता है, मगर लागू कर पाना आसान नहीं होगा। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इसमें कई तरह की तकनीकी समस्याएं हैं। मगर एक समय ऐसा आ सकता है जब ऐसा ही सख्त कदम उठाना पड़ सकता है।

पार्किंग की जगह होने पर ही रजिस्ट्रेशन
शहर में नए वाहनों के पंजीकरण के समय पार्किंग की जगह है या नहीं, यह बताना पड़ता है। रजिस्ट्रेशन के समय हर कोई उसी ऑप्शन पर टिक करता है। जानकारों का मानना है कि यह एक छलावे से ज्यादा कुछ नहीं है। कोई अधिकारी मौके पर जांच करने नहीं जाता।

अराइव सेफ एनजीओ के अध्यक्ष हरमन सिद्धू का कहना है कि एक घर के पते पर एक वाहन का रजिस्ट्रेशन लागू करना कड़ा कदम होगा, जो पुलिस प्रशासन के लिए उठाना आसान नहीं है। मगर भविष्य में यह फैसला लेना पड़ सकता है। घरों के आगे पार्किंग नहीं है, फिर भी एक घर में दोपहिया और कारों को मिलाकर तीन वाहन हैं। खासकर दक्षिणी सेक्टरों में रात में इमरजेंसी के समय दमकल की गाड़ी को मौके तक ले जाना बहुत मुश्किल होता है।

पब्लिक ट्रांस्पोर्ट का करें इस्तेमाल
फॉसवेक के चेयरमैन बलजिंदर सिंह बिट्टू का कहना है कि वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण यहां भी सम विषम योजना लागू करने की बात हो रही है। पुलिस कार फ्री डे मनाने जा रही है। लेकिन एक पते पर एक गाड़ी की रजिस्ट्रेशन के सिद्धांत को लागू करना मुश्किल होगा। पुलिस प्रशासन को चाहिए वह लोगों को जागरूक करें की सिर्फ स्टेटस सिंबल या पड़ोसी को देखकर ज्यादा गाड़ियां न खरीदें। पब्लिक ट्रांस्पोर्ट का अधिक इस्तेमाल करें। ऐसा न होने पर एक पते पर एक गाड़ी के रजिस्ट्रेशन का कानून भी लागू करना पड़ सकता है।

राजीव अंबष्ट, डीएसपी, ट्रैफिक, चंडीगढ़ पुलिस ने बताया कि वाहनों की संख्या लगातार शहर में बढ़ रही है, जो चिंताजनक है। इसको लेकर पुलिस र्कोई पॉलिसी नहीं बना सकती। पुलिस का काम सिर्फ कानून को लागू करवाना होता है। प्रशासन के  कहने पर शहर में कार फ्री डे मनाया जा रहा है। पुलिस लोगों को सिर्फ जागरूक कर सकती है कि वह पब्लिक ट्रांस्पोर्ट का ज्यादा इस्तेमाल करें।
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