दूसरे चरण में 73 बसों को जोड़ा जाएगा। इसके बाद तीसरे चरण में बाकी बची 185 बसों को भी जोड़ दिया जाएगा। परिवहन विभाग ने निदेशक उमा शंकर गुप्ता ने बताया कि दूसरे चरण का काफी काम पूरा हो चुका है। जीपीएस इंस्टॉल किया जा चुका है।
अब बसों को डिपो नंबर-4 से जोड़ा जा रहा है और बसों का ट्रायल लिया जा रहा है। इसकी रिपोर्ट आने के बाद इन्हें भी एप से जोड़कर लोगों के लिए शुरू कर दिया जाएगा। वहीं बाकी बची 185 बसों को स्मॉर्ट बनाने का भी काम शुरू हो चुका है। कंपनी दिसंबर 2020 तक अपना काम पूरा कर लेगी।
यह सुविधाएं मिलेंगी
- सभी बस स्टॉप पर इलेक्ट्रॉनिक डिस्पले लगाए जा रहे हैं, ताकि बसों के आने के सही वक्त का पता लगेगा।
- आपातकालीन अलार्म की सुविधा होगी।
- बसों की कनेक्टिविटी बस स्टॉप से होगी। इससे लोगों को लोगों को पता लग सकेगा कि कितनी देर में बस पहुंचेगी।
- यह सुविधा मोबाइल एप के माध्यम से मिलेगी
- सीटीयू की सभी बसों में इंस्टाल किया जा रहा जीपीएस, इससे बसें की जाएंगी ट्रैक।
- बस ड्राइवरों को मिलेगी एसएमएस की सुविधा, जिससे कि वह अपने निकलने के वक्त की जानकारी दे सकेंगे
- सीटीयू के सेंट्रल सिस्टम द्वारा की जाएगी इसकी निगरानी।
- दिल्ली मेट्रो की तर्ज पर स्मार्ट बस पास भी बनाए जाएंगे।
- बस डिपो को भी जोड़ा जाएगा प्राइमरी कंट्रोल स्टेशन से।