कई शहरों में एक भी चालान नहीं, या तो आंकड़े गलत, या अधिकारियों की मंशा नहीं
एक्ट में प्रावधान होने के बावजूद अधिकारियों पर आंखें मूंदे बैठे रहने का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब में पाॅलीथिन बैन करने के बावजूद इसे रोकने के लिए कोई कदम न उठाए जाने के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अब मुख्य सचिव को हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि सरकार ने जो आंकड़े सौंपे हैं, उसके अनुसार कई शहरों में एक भी चालान नहीं किया गया है। या तो आंकड़े गलत हैं, या फिर अधिकारियों की मंशा कार्रवाई करने की नहीं है।
याचिका दाखिल करते हुए मोहाली निवासी हरि कृष्ण ने एडवोकेट रंजीत सिंह के माध्यम से हाईकोर्ट के समक्ष पाॅलीथिन का मुद्दा रखा। याची ने बताया कि पंजाब सरकार ने एक एक्ट बनाकर पाॅलीथिन को बैन करने साथ ही इसको रेगुलेट करने के लिए नोटिफिकेशन भी जारी की थी। इसके अनुसार पाॅलीथिन के प्रयोग को लेकर विभिन्न शर्तें रखी गई थी। एक्ट और प्रावधान होने के बावजूद पंजाब में इसके प्रावधानों का पालन नहीं करवाया जा रहा है। सरेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। हाईकोर्ट ने इसपर पंजाब सरकार से जवाब मांगा तो पंजाब सरकार ने बताया कि ऐसी ही एक अन्य याचिका हाईकोर्ट में विचाराधीन है और इस याचिका को भी उसके साथ सुना जाए। हाईकोर्ट ने तब कहा था कि यह याचिका उस याचिका से अलग है क्योंकि यहां पर याचिकाकर्ता कह रहा है कि एक्ट होने के बावजूद उसे लागू नहीं किया जा रहा है।
सुनवाई के दौरान हलफनामे में पंजाब सरकार को बताया कि 2023 में लुधियाना शहर में शून्य चालान, रूपनगर में केवल 9 चालान, पठानकोट-शून्य चालान, जीरकपुर में शून्य चालान, सुनाम-शून्य चालान, तरनतारन-5 चालान, खमाणाें- शून्य चालान, मालेरकोटला-7 चालान, गुरदासपुर-20 चालान और बरनाला-शून्य चालान प्लास्टिक बैग ले जाने के उल्लंघनकर्ताओं को जारी किए गए। हाईकोर्ट ने अब इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य सचिव को हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।