98 प्रतिशत किसान कर्जदार
एक रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में खेती किसानी से जुड़े 98 प्रतिशत परिवार कर्जदार हैं। जिसके कारण सूबे के किसान लगातार आत्महत्या कर रहे हैं। एक आंकड़ों के अनुसार हर साल 600 से 700 किसान पंजाब में कर्ज के कारण आत्महत्या कर रहे हैं। पंजाब के इस मुद्दे को लेकर हमेशा सियासतदान अपनी राजनीतिक स्वार्थों को सिद्ध करते रहे हैं।
35 हजार करोड़ है कर्ज
पंजाब के किसानों की आत्महत्या की एक बड़ी वजह राज्य के किसानों पर लगभग 35 हजार करोड़ रुपये कर्ज है। इस कर्ज का अधिकांश हिस्सा आढ़तियों का है। एक रिपोर्ट के अनुसार आढ़तियों के कर्ज के कारण ही किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं।
किसान बन गए सियासतदान
कृषि कानूनों के विरोध में शुरू हुआ किसान आंदोलन का जनक पंजाब रहा। इसको खड़ा करने में राज्य की 32 किसान संगठनों ने अहम भूमिका निभाई। आंदोलन फतेह करने के बाद सूबे के किसान सियासतदान बन गए। हालांकि 32 में से सिर्फ 22 संगठनों ने ही चुनाव लड़ने का फैसला किया। अन्य किसान संगठनों ने चुनाव से दूरी बना ली।
77 सीटों पर किसानों का प्रभाव
पंजाब की कुल 117 विधानसभा सीटों में से 77 सीटें ऐसी हैं जिन पर किसानों का प्रभाव है। यह भी कह सकते हैं कि पंजाब की सत्ता की चाबी किसानों के पास ही है। यही कारण रहा कि अभी तक पंजाब के सभी सियासी दल किसानों का समर्थन हासिल करने की जुगत में रहते रहे हैं।