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'आईएसआई ने सिख श्रद्धालुओं के पीछे लगा दिए खालिस्तानी, ब्रेन वॉश करने की हुई कोशिश'

Mon, 22 Apr 2019 02:21 AM IST
Vikas Kumar अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर
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isi - फोटो : फाइल फोटो
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वैसाखी के पावन अवसर पर पाकिस्तान स्थित एतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन के लिए गए श्रद्धालुओं के जत्थे के पीछे आईएसआई ने ब्रिटेन, अमेरिका व अन्य देशों में शरण लिए हुए खालिस्तानियों को लगा दिया। खालिस्तान समथर्कों ने जत्थे में शामिल कुछ श्रद्धालुओं का खालिस्तानी मूवमेंट में शामिल होने के लिए ब्रेन वॉश करने की कोशिश की। भारत सरकार के विरुद्ध भड़काया गया। गुरुद्वारा पंजा साहिब में सजे धार्मिक दीवान के अवसर पर खलिस्तान की घोषणा करने का प्रयास किया गया। 

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इस बात की जानकारी पाकिस्तान से दस दिन की धार्मिक यात्रा के बाद स्पेशल ट्रेन से अटारी रेलवे स्टेशन पर पहुंचे जत्थे के एक सदस्य मनजोत सिंह (बदला हुआ नाम) ने दी। उन्होंने बताया कि इस बार पाकिस्तान ने यात्रियों का अभूतपूर्व स्वागत किया। लेकिन साथ ही आईएसआई ने खालिस्तानी गतिविधियों को शह देने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

उन्होंने बताया कि 14 अप्रैल को पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा कमेटी के महासचिव गोपाल सिंह चावला के नेतृत्व में खालिस्तानी सिखों ने भारत के खिलाफ जहर उगला था। गोपाल चावला ने एक बार फिर भारतीय सिख तीर्थयात्रियों को पंजाब को हिंदुस्तान के बाकी हिस्सों अलग करने के मूवमेंट शुरू करने के लिए उकसाया। इस अवसर पर पीएसजीपीसी, अकाफ बोर्ड, आईएसआई व पाकिस्तान सरकार के कई अधिकारी इस धार्मिक मंच पर मौजूद थे। इसके विपरीत, पाकिस्तान सरकार ने संभवत: अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आलोचना से बचने के लिए, अमेरिका के खालिस्तानी विचारक गुरुपतवंत सिंह पन्नू पर गुरुद्वारा पंजा साहिब से रेफरेंडम- 2020 का पंजीकरण शुरू करने के लिए प्रतिबंध लगा दिया था।
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पाकिस्तानी नागरिकों ने लुटाया स्नेह

जत्थे के साथ आए एक तीर्थयात्रियों एसएस भुल्लर ने भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए किए गए इंतजामों पर चर्चा की। लंगर और सुरक्षा की व्यवस्था सही थी। बटाला निवासी सुखविंदर सिंह ने कहा कि वह पाकिस्तान सरकार के आतिथ्य से बहुत प्रभावित हुए। साथ ही साथ आम पाकिस्तानी नागरिकों द्वारा उन पर प्यार और स्नेह बरसाया गया।

मनदीप कौर ने बताया कि गलियारे के चल रहे निर्माण कार्य को दिखाने के लिए उन्हें करतारपुर साहिब ले जाया गया। वह युद्ध स्तर पर निर्माण कर रहे हैं और मुझे लगता है कि वे अगले दो महीने में गलियारे का काम पूरा कर लेंगे। कुछ यात्रियों का कहना था कि गुरुद्वारा पंजा साहिब में यात्रियों के ठहरने के लिए कमरों कि कमी थी।
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