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आईएसआई के साथ मिलकर आईएसवाईएफ फैला रहा है भारत में आतंकवाद, बेनकाब हुई साजिश

Thu, 22 Nov 2018 03:29 PM IST
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
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Terrorism
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एक बार फिर से पंजाब में आतंकवाद फैलाने की साजिश बेनकाब हो गई, इसमें इंडियन सिख यूथ फेडरेशन के लखबीर सिंह रोडे व हरमीत सिंह हैप्पी का सीधा हाथ निकला। इंडियन सिख यूथ फेडरेशन ने लाहौर छावनी क्षेत्र को ही अपनी गतिविधियों का मुख्य अड्डा बना रखा है, जहां से पूरा नेटवर्क संचालित किया जा रहा है।

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इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन पर यूके ने 15 साल लगातार प्रतिबंध लगाकर रखा था, उस पर से दो साल पहले ही प्रतिबंध हटाया गया है। कनाडा में भी इस संगठन से प्रतिबंध हटाने के लिए जबरदस्त लॉबिंग चल रही है। पंजाब में 2016 व 2017 में लगातार इंडियन सिख यूथ फेडरेशन की सक्रियता जारी रही और पंजाब में कई बार आतंकवादी मॉड्यूल पकड़े गए, जिसमें चार जून 2017 को नवांशहर व मोहाली में भी गिरफ्तार हुए थे। आईबी व केंद्रीय एजेंसियों की तरफ से लगातार आईएसवाईएफ के नेटवर्क पर होम वर्क किया गया।  

आईएसआई के संरक्षण में काम कर रहा आईएसवाईएफ का प्रधान

इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन का प्रधान लखबीर सिंह रोडे पाकिस्तान में आईएसआई के संरक्षण में अपना ऑपरेशन चला रहा है। 1984 में संगठन ने यूरोप में अपने पैर पसारने शुरू किए और यूके में अपना संगठन तैयार किया। 1985 व 2001 में एयर इंडिया की उड़ानों में आतंकवादी घटना इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन की ओर से की गई थी। इसे देखकर 27 मार्च, 2001 को यूके ने इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन पर प्रतिबंध लगा दिया।

2002 में भारत में भी इस संगठन को आतंकवादी संगठन करार दिया गया और उस पर केंद्र सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया। 2006 में आईएसवाईएफ की ओर से पाकिस्तान से भारी मात्रा में आरडीएक्स व अन्य हथियार जालंधर से बरामद किए गए। इसमें इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन के चीफ भाई लखबीर सिंह रोडे का भतीजा जसविंदर सिंह भी गिरफ्तार किया गया था।

इसके बाद काफी समय तक इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन ने गतिविधियों को विराम लगा दिया और उसका स्थान बब्बर खालसा इंटरनेशनल व खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स ने ले लिया। जिसमें वधावा सिंह व रंजीत सिंह नीटा लगातार सक्रिय हो गये। आईएसआई ने पाक में ही बैठे बब्बर खालसा के चीफ वधावा सिंह व खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स के चीफ रंजीत सिंह नीटा को तबाही की जिम्मेदारी दी। इस बीच यूके में कई सिख संगठनों ने इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन से प्रतिबंध उठाने की मांग करनी शुरू कर दी।
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2016 में इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन से प्रतिबंध हटा लिया गया

सिख फेडरेशन (यूके) के चेयरमैन अमरीक सिंह ने 2016 में प्रतिबंध के खिलाफ लॉर्ड्स में मतदान के बाद कहा था कि द सिख फेडरेशन (यूके) और सिख समुदाय ने बीते 15 वर्षों से हमेशा से बनाए रखा है कि एक संगठन के रूप में आईएसवाईएफ कभी भी आतंकवाद के साथ शामिल नहीं था। 2001 में अकेले ब्रिटेन में आईएसवाईएफ पर प्रतिबंध राजनीति से प्रेरित था। भारतीय अधिकारियों को खुश करने के साथ किया गया था।

इसके बाद 2016 में इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन से प्रतिबंध हटा लिया गया था। आईवाईएसएफ की तरफ से यूके में अपना नेटवर्क मजबूत किया गया, जिसके बाद पंजाब में टारगेट किलिंग हुई और इसमें भी यूके के रहने वाले जौहल की भूमिका सामने आई, जिसके संबंध हरमीत हैप्पी पीएचडी के साथ पाये गए। रविवार को निरंकारी भवन में आईएसवाआईएफ की भमिका ने एक बार फिर से एजेंसियों को नए सिरे से होमवर्क करने पर मजबूर कर दिया है।

जिस स्थान पर निरंकारी भवन में विस्फोट हुआ है, वहां से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर पहले भी इंडियन सिख यूथ फेडरेशन अपनी मौजूदगी दिखा चुका है। 21 मई 2017 को अजनाला सेक्टर में  गुरदासपुर निवासी मान सिंह और करतारपुर (जालंधर) निवासी शेर सिंह को गिरफ्तार किया गया था। जिनका संबंध गुरजीवन सिंह के साथ था, जो आगे पाकिस्तान में बैठे इंडियन सिख यूथ फेडरेशन के लखबीर रोडे व हरमीत सिंह हैप्पी पीएचडी के लिए काम करता था।
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