सरकारी लापरवाही और अधिकारियों की आधी-अधूरी योजनाओं के चलते रेल यात्रियों के खाने-पीने की सुविधा छिन गई है। मामला चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन के बाहर बने फूड प्लाजा का है। चंद महीनों तक यात्रियों को यहां मनपसंद व्यंजन मिले और बाद में फूड प्लाजा बंद कर दिया गया। अगस्त 2017 में बंद हुए प्लाजा को शुरू करने के लिए आईआरसीटीसी द्वारा चार बार टेंडर कॉल किया गया, लेकिन कोई भी ब्रांडेड कंपनी आगे नहीं आई। ऐसे में स्टेशन पर रेल यात्रियों को अच्छा फूड स्टाल नहीं मिल रहा है।
आईआरसीटीसी के अधिकारियों की मानें तो टेंडर फीस की दरों में भी कमी की गई है। एक ओर जहां पहले फूड प्लाजा के लिए 15 लाख 51 हजार रुपये टेंडर फीस रखी गई थी, उसे घटाकर 10 लाख 33 हजार रुपये कर दिया था। बावजूद इसके एक भी कंपनी टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने के लिए आगे नहीं आई। आईआरसीटीसी ने ब्रांडेड कंपनियों को टेंडर प्रक्रिया में शामिल करने का फैसला किया था। ब्रांडेड कंपनियां तो आई नहीं, दूसरे लोगों को भी मौका नहीं दिया गया, जिसके चलते फूड प्लाजा पर ताला लग गया।
बता दें कि आईआरसीटीसी ने टेंडर प्रक्रिया के लिए शर्त रखी थी कि जिस कंपनी का दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, अहमदाबाद, पुणे, बंगलूरू, हैदराबाद जैसे चार महानगरों में आउटलेट होंगे और वो भी रेलवे स्टेशन परिसर से बाहर, उन्हें ही टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने का मौका मिलेगा।