क्षेत्र के नजदीकी गांवों के इराक में फंसे चार नौजवानों के परिजन अपने लाडलों की सुरक्षा के प्रति खासे चिंतित हैं। मंदिर और गुरुद्वारों में उनकी सलामती के लिए दुआएं मांगी जा रही हैं।
इराक के शहर बसरा में फंसे जगप्रीत सिंह (25) के भाई राजबीर सिंह गांव निक्के घुमणां बटाला ने बताया कि जगप्रीत छह माह पहले इराक में लेबर का काम करने गया था।
इस समय वह इराक की वादीसभा कंपनी में काम कर रहा था। इस कंपनी ने आगे उसे किसी अन्य कंपनी के काम में लगा दिया। वीरवार रात जगप्रीत का फोन आया था कि इराक में हालात बहुत खराब हो चुके हैं।
इन हालातों में भी डाला जा रहा काम का दबाव
इस गंभीर हालातों में भी उसे दो-तीन किमी दूर पैदल काम करने के लिए भेजा जा रहा है। कंपनी में काम करने वाले भारतीयों को उनके पासपोर्ट वापस नहीं किए जा रहे हैं।
उन्हें कहा जा रहा है कि यदि वह काम नहीं करेंगे तो उन्हें पैसा और खाना नहीं दिया जाएगा। उसने बताया कि छह माह से उन्हें पगार नहीं मिली है। कंपनी के दबाव के कारण उन्हें सब कुछ करना पड़ रहा है।
जगप्रीत सिंह के भाई राजबीर ने सरकार से अपील की कि केंद्र सरकार इराक में फंसे भारतीयों को कंपनियों से पासपोर्ट वापस दिलवाकर और उन्हें टिकट के पैसे देकर भारत लाए ताकि वह विदेश में फंसे अपने पारिवार के सदस्य से मिल सकें।
कंपनियां वापस नहीं लौटा रही उनके पासपोर्ट
कुलवंत सिंह (45) के भाई निशान सिंह वासी गांव भगतपुर रब्बवाला बटाला ने बताया कि कुलवंत सिंह एक साल पहले इराक के बालून शहर में वेल्डर का काम करने के लिए गया था। इससे पहले वह गांव में खेती बाड़ी का काम करता था। उसकी दो बेटियां और एक बेटा है। कुलवंत इराक में बलदाबिया कंपनी में काम करता है।
निशान सिंह ने बताया कि कई दिनों के बाद वीरवार रात कुलवंत का फोन आया। उसने बताया कि इराक में हालात बहुत खराब हो चुके हैं। इराक में उसके साथ 70 अन्य पंजाबी फंसे हुए हैं। निशान ने बताया कि फोन पर कुलवंत सिंह ने बताया कि इराक की कंपनी उन्हें पासपोर्ट वापस नहीं दे रही है।
केंद्र सरकार से की वापस लाने की अपील
दविंदर सिंह (24) के भाई भूपिंदर सिंह वासी बसंत नगर बटाला ने बताया कि उसका भाई 25 दिन पहले ही इराक में वॉल पेंटिंग के काम के लिए गया था। उसका भाई यहां से जीएमएस कंपनी में गया था लेकिन वहां उसे किसी अन्य कंपनी में भेज दिया गया। जब से इराक में हालात खराब हुए हैं तब से एक ही बार दविंदर से बात हुई है।
वीरवार रात करीब 12 बजे उसका फोन आया। उसने बताया कि उसे जल्द से जल्द भारत ले आएं। उसके पास के क्षेत्र में 15 लोग मर चुके हैं। इस समय कंपनी उन्हें खाना तक नहीं दे रही और न ही कहीं बाहर भेज रही है।
इराक में फंसे सुरजीत सिंह के भाई गुरमीत सिंह वासी गांव बलड़वाल श्री हरगोबिंदरपुर ने बताया कि उसका भाई इराक के एक रिसोर्ट में वेटर का काम करता है। सुरजीत ने उन्हें फोन पर अपने सुरक्षित होने की सूचना दी है।