आम आदमी पार्टी के बागी विधायक सुखपाल खैरा ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस सरकार बेअदबी और फायरिंग के दोषी पुलिस अफसरों को बचने का रास्ता दे रही है। सरकार पूरी तरह आरोपियों के साथ मिली हुई है। अपने आवास पर मीडिया से बातचीत में खैरा ने कहा कि दोषियों को सजा देने की प्रक्रिया में सरकार शातिराना रवैया अपना रही है। उन्हें बचने को सेफ पैसेज मुहैया करा रही है कि अदालत के जरिए किसी तरह राहत ले लो।
एडवोकेट जनरल की नाक के नीचे से आईपीसी की धारा 302 के सभी आरोपी जमानत ले गए। पहले चार पुलिस अफसर, अब पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी को भी राहत मिल गई। खैरा ने आरोप लगाया कि यह कैप्टन सरकार की मर्जी के बिना नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि कैप्टन ने 15 दिन पहले राजनाथ सिंह से मुलाकात की, उसके बारे में खुलासा करें।
उन्हें केंद्र ने निर्देश दिए हैं कि दोषियों पर पुलिस कार्रवाई नहीं करनी है। बादलों को भाजपा बचा रही है। कैप्टन के दामाद पर सौ करोड़ की धोखाधड़ी के केस में सीबीआई का शिकंजा है, इसलिए वह केंद्र के कहने पर चल रहे हैं। जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट जून में आ गई थी, पर अब तक कुछ नहीं हुआ। हमने 15 दिन का अल्टीमेटम दिया था। 14 को बरगाड़ी में भोग में शामिल होंगे, उसके बाद एक्शन कमेटी की बैठक में अगली रणनीति तय की जाएगी। खैरा ने कहा कि अगर बादल सही थे तो उन्होंने आरोपी पुलिसकर्मियों को क्यों नहीं पकड़ा।
12 विधायकों से की साथ आने की अपील
सुखपाल खैरा ने कहा कि दिल्ली का प्रयोग फेल हो गया है। जो 12 विधायक कहते थे कि हम दिल्ली हाईकमान के हैं, वे तीसरा विकल्प बनने में रुकावट बन रहे हैं। वे हमारे साथ आएं ताकि पंजाब का भविष्य बनाया जा सके। खैरा ने कहा कि वह कोई सियासी पार्टी या पंथक प्लेटफार्म नहीं बनाने जा रहे हैं। यह इंसाफ की लड़ाई है, उसमें पहले भी शामिल थे। उनके साथी विधायक ही कहते थे कि बरगाड़ी मत जाओ, अब खुद वहां गए हैं।