चंडीगढ़। पीयू के दो विभागों से चोरी हुई करोड़ों की दो हेरिटेज टेबल का मामला चर्चा का विषय बन गया है। ‘अमर उजाला’ के मंगलवार को खुलासे के बाद मामले की जांच प्रभारी वाइस चांसलर एवं डीयूआई प्रो. शंकरजी झा ने चीफ सिक्योरिटी अफसर प्रो. अश्वनी कौल को सौंपी है। उन्होंने कहा है कि क्लास रूम का ताला तोड़कर टेबल गायब की गई हैं तो इससे साफ है कि वह चोरी हुई हैं और वह टेबल सामान्य नहीं हो सकती हैं? उधर, चीफ सिक्योरिटी अधिकारी प्रो. अश्वनी कौल का कहना है किइस मामले की जांच पुलिस करेगी। उनकी तहरीर भेज दी गई है। वहीं, सेक्टर-11 थाने कीपुलिस का कहना है कि इस संबंध में न कोई शिकायत मिली है और न ही कोई एफआईआर दर्ज की गई है।
जानकारों ने बताया कि फ्रेंच व जर्मन विभाग की इन टेबलों पर कंप्यूटर रखे थे। यदि टेबल सामान्य होती तो उससे कीमती तो कंप्यूटर थे और जिनको बाहर ले जाना भी आसान होता? विभाग व सुरक्षा में लगे अधिकारी अपने बचाव के लिए तमाम तर्क दे रहे हैं, लेकिन वह खुद ही सवालों के कटघरे में खड़े हैं। पीयू के फ्रेंच व जर्मन विभाग में दो टेबल कुछ दिन पहले चोरी हुई थी। उस मामले को हर किसी ने दबाया, लेकिन मंगलवार को इसका पर्दाफाश किया। जैसे ही उच्चाधिकारियों तक मामला पहुंचा तो उन्होंने गंभीरता से लिया। लेकिन वह भी ऐसे ही जवाब दे रहे हैं जैसे अपना बचाव कर रहे हों।
क्या कहते हैं जिम्मेदार लोग...
जांच जारी, दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई
चीफ सिक्योरिटी अधिकारी से इसकी जानकारी ली है तो उन्होंने तफ्तीश करने की बात कही है। साथ ही विभाग अध्यक्षों से भी जवाब मांगा है। इस प्रकरण में जो भी दोषी होगा उन पर कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-प्रो. शंकरजी झा, प्रभारी वाइस चांसलर
इस मामले की जांच पुलिस के हवाले
पहले के प्रकरणों की वह जांच कर रहे हैं। वर्तमान मामले की जांच पुलिस करेगी। उनकी ओर से तहरीर भेज दी गई है।
-प्रो. अश्वनी कौल, चीफ सिक्योरिटी अधिकारी
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विभाग अपने बचाव के लिए खोज रहे रास्ते
फ्रेंच व जर्मन विभाग के लोग इस प्रकरण में अपने बचाव के लिए रास्ते खोज रहे हैं। कोई टेबल को सामान्य बता रहा है तो कोई चोरी न होने की बात कह रहा है। हर कोई इस प्रकरण को एक-दूसरे पर टाल रहे हैं। खैर जो भी हो हेरिटेज फर्नीचर चोरी होना सभी के लिए गले की फांस बन गया है।
सुलगते सवाल?
1. 10 अक्तूबर को यह टेबल चोरी हुई थीं, लेकिन अब तक न तो विभाग और सिक्योरिटी के अफसर यह पता नहीं लगा पाए कि टेबल कौन सी थी, चोरी हुई की नहीं? चोरी को कैसे अंजाम दिया गया?
2. यदि तहरीर पहले पुलिस को दी गई थी तो पुलिस अब तक संबंधित विभागों में जांच के लिए क्यों नहीं पहुंची?
3. विभागों को यह पता ही नहीं कि यह टेबल हेरिटेज हैं या नहीं। जबकि विभागों को जब फर्नीचर दिया जाता है तब इसके नंबर व रिकॉर्ड रखा जाता है।